नयी दिल्ली: भारत कनाडा के संबंध अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। हाल ही में हुए घटनाक्रम नजर डालें तो पाएंगे कि कनाडियाई पीएम ट्रूडो ने अपनी सिक्ख वोट बैंक को खुश करने के लिए भारत और भारत के जेल में बंद एक अपराधी लॉरेंस बिश्नोई पर गंभीर और बेबुनियाद आरोप लगाएं है। कनाडा खुद भारत के आंतरिक मामलों में दखल अंदाजी कर भारत के राजनयिक पर आरोप लगा रहा कि उनके यहां पल रहे भारत विरोधी खालिस्तानी आतंकवादियों की हत्या में भारत के राजनयिक संजय कुमार वर्मा की संलिप्तता है। इसके साथ ही बेहद गैरजिम्मेदाराना बयान देते हुए कनाडा ने साबरमति जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई को खालिस्तानी आतंकवादी निज्जर हत्याकांड का दोषी करार दिया है। ये मामला ज्वलंत तब होता है जब कनाडा ने भारत के साथ साझा किए एक डिप्लोमैटिक कम्युनिकेशन में कनाडा में भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और अन्य भारतीय राजनयिकों पर जून 2023 में खालिस्तान समर्थक एक्टिविस्ट हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में जुडे़ होने का आरोप लगाया। कनाडा के द्वारा भारत के उच्चायुक्त पर इस प्रकार निराधार आरोप पर कड़ा विरोध जताते हुए भारत ने दिल्ली स्थित उसके मिशन के सीनियर डिप्लोमैट को समन किया। इस दौरान भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडा में भारतीय उच्चायोग और अन्य राजनयिकों पर बेबुनियाद निशाना हमें अस्वीकार्य है।
वहीं सोमवार की शाम भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, ट्रूडो सरकार के रवैए के कारण भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा ख़तरे में है। हमें वर्तमान सरकार में कोई भरोसा नहीं है। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने कनाडा से अपने उच्चायुक्त समेत अन्य राजनयिकों को वापस बुलाने का फ़ैसला किया है। हमने कनाडा को बता दिया है कि ट्रूडो सरकार जिस तरह से भारत के ख़िलाफ़ अलगाववाद और अतिवाद का समर्थन कर रही है, उसके ख़िलाफ़ भारत के पास जवाब देने का अधिकार है। भारत के इस कड़े रूख के बाद नई दिल्ली स्थित कनाडा के उच्चायोग ने भारत को कथित रूप से सबूत जुटाए और अपने समन के जवाब में कनाडाई मिशन के सीनियर राजनयिक स्टीवर्ट व्हीलर ने कहा, भारत लंबे समय से जो मांग कर रहा था, कनाडा ने वो मांग पूरी कर दी है। कनाडा ने कनाडा की ज़मीन पर कनाडाई नागरिक की हत्या के मामले में भारतीय एजेंट और उनके भारत की सरकार से संबंध से जुड़ा ठोस सबूत सौंप दिया है। अब बारी भारत की है कि वह इस पर क़दम उठाए. यह दोनों देशों और वहाँ की जनता के हित में होगा। कनाडा इस मामले में सहयोग करने के लिए तैयार है।
बता दें कि कनाडा की राजनीतिक स्थिति बेहद चिंताजनक है। वहां सिक्खों की आबादी इतनी है कि वो एकजुट होकर सत्ता को हिला सकते है। अब सिक्ख बोट बैंक को लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को अपनी कुर्सी बचानी है और कनाडा के खालिस्तानी सर्मथक आतकवादियों ने सरकार को ही अपने इशारों में नचा रखा है। वहीं इस पूरे मामले में भारत की ओर से कहा गया कि यह मुद्दा अब राजनीति से जुड़ गया है क्योंकि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। हमें रविवार को कनाडा से एक डिप्लोमैटिक कम्युनिकेशन मिला था। इसमें बताया गया है कि कनाडा में चल रही एक जाँच में भारत के उच्चायुक्त और अन्य राजनयिकों का जुड़ाव सामने आया है। भारत सरकार इन बेतुके आरोपों को सिरे से नकारती है। कनाडा की ट्रूडो सरकार वोट बैंक साधने के लिए ऐसा कर रही है। वर्मा वरिष्ठ सेवारत राजनयिक हैं। उनका 36 साल का करियर है। वह जापान और सूडान में भारत के राजदूत रहे हैं। इसके अलावा वर्मा इटली, तुर्की, वियतनाम और चीन में भी सेवाएं दे चुके हैं। उन पर इस तरह की आरोप लगाना हास्यास्पद है और यह अवमानना की तरह है।
मालूम हो कि कनाडा के खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पिछले साल 18 जून को अज्ञात हमलावरों के एक समूह ने की थी। इसके बाद पिछले साल सितंबर में जस्टिन ट्रूडो ने हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा था कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट शामिल थे। इस हत्या को लेकर भारत शुरू से ही कहता रहा है कि कनाडा ने निज्जर की हत्या के मामले में केवल आरोप लगाया है न कि कोई सबूत दिया है। भारत ने कनाडा की जाँच को बहाना बताते हुए कहा कि कनाडा की सरकार राजनीतिक फ़ायदे के लिए जानबूझकर भारत पर आरोप लगा रही है। वहीं कनाडा की सरकार पर सिख वोट बैंक की राजनीति करने जैसे गंभीर मामले को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो हिंसक अतिवादियों और आतंकवादियों को पनाह दे रहे हैं जो कनाडा में भारतीय राजनयिकों और वहाँ के सामुदायिक नेताओं को धमकी देते हैं। कनाडा की सरकार ऐसा अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर होने दे रही है। कुछ ख़ास लोग जो कनाडा में अवैध रूप से गए, उन्हें नागरिकता देने में तनिक भी देरी नहीं की गई। कनाडा ने भारत के प्रत्यर्पण की माँग को नकार दिया ताकि आतंकवादी कनाडा में रह सकें। अपने बयान में भारत ने कहा कि प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के भारत के साथ विरोध के कई सबूत हैं। साल 2018 में जब वह भारत के दौरे पर आए तो उनका लक्ष्य अपना वोट बैंक साधना था। उनकी कैबिनेट में वैसे लोगों को शामिल किया गया जो खुलेआम एक अतिवादी और भारत के ख़िलाफ़ अलगाववादी एजेंडा चलाने वालों से जुड़े थे। ट्रूडो की सरकार एक ऐसी पार्टी पर निर्भर थी, जिसके नेता भारत के ख़िलाफ़ अलगाववाद का खुलेआम समर्थन करते हैं।
बताते चलें कि कनाडा को भारत के विरोध में बोलना एक तरह से उसकी मजबूरी भी है। इसका कारण वहां की मिली जुली सरकार है। बता दें ट्रूडो की सरकार भारत के अलगाववादी सोच रखनेवाले जगमीत सिंह की पार्टी एनडीपी के समर्थन से ही चल रही थी। निज्जर हत्याकांड को लेकर जस्टिन ट्रूडो की सरकार से न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) नेता जगमीत सिंह ने चार सितंबर को समर्थन वापस लेने की घोषणा की थी। इसके बाद ट्रूडो ने एनडीपी के समर्थन वापस लेने के बावजूद विश्वास प्रस्ताव जीतने में कामयाब रहे । लेकिन मसला यहीं पर आकर अटक जाता है असल में कनाडा में अक्तूबर 2025 में चुनाव होने हैं। ट्रूडो चाहते हैं कि वहाँ के सिख उनका समर्थन करें। जस्टिन ट्रूडो 2015 से सत्ता में बने हुए हैं। 2019 और 2021 में ट्रूडो की पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी और वो दूसरी पार्टी के समर्थन से सरकार में हैं।
वहीं जगमीत सिंह बराबर भारत विरोधी बयानो से सुखियों में रहते हैं। इस बीच जगमीत ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर इस बारे में एक विस्तृत बयान जारी किया है और उन्होंने कहा है कि हम भारतीय राजनयिकों को निष्कासित करने के फ़ैसले का स्वागत करते हैं। सिंह ने कनाडा की सरकार से मांग की है कि वो भारत पर राजनयिक प्रतिबंध लगाए और कनाडा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को बैन करे। आज जो भी बातें उजागर हुईं, उन्होंने ये और स्पष्ट कर दिया है कि मोदी सरकार हत्या, उगाही और कनाडा की धरती पर कनाडाई लोगों को नुकसान पहुंचाने जैसे संगठित अपराधों में संलिप्त है। जगमीत सिंह ने लिखा है, आरसीएमपी के कमिश्नर ने जो जानकारी आज जारी की हैं, उनसे एनडीपी बेहद चिंतित है।
कनाडाई, ख़ासतौर पर कनाडा में रह रहे सिख समुदाय को डर, धमकियों, शोषण और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। उनके साथ उगाही, चुनाव में दखलअंदाज़ी जैसे मामले सामने आ रहे हैं और ये सब कुछ कथित तौर पर भारतीय अधिकारियों के हाथों में है। तो कुल मिलाकर भारत ने कनाडा के आरोपों का न सिर्फ खंडन किया बल्कि इसे कनाडा में आने वाले चुनाव के लिए सिक्ख वोट बैकं को साधने की कवायद भी करार दिया है। वहीं भारत खालिस्तानी अलगाववादी समर्थक जगमीत सिंह सहित कनाडा से ऐसे कुछ लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करता रहा जिन पर भारत ख़ालिस्तानी समर्थक होने का आरोप लगाता रहा है। भारत की इस जायज मांग को कनाडा शुरू से ही अनसुनी करता आया है और अब कनाडा में चुनाव से पहले जस्टिन ट्रूडो की सरकार एक बेबुनियाद आरोप के साथ अपने वोट बैंक को प्रसन्न करने भारत पर आरोप लगा रही।




















