लोकसभा के शीतकालीन सत्र में आज केंद्र सरकार ने नक्सली उग्रवाद (India Naxal Update) के खात्मे और आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश की। सरकार के अनुसार 2014 से अब तक 9,588 माओवादी हथियार छोड़ चुके हैं, जिनमें 2,167 आत्मसमर्पण इसी वर्ष हुए। लोकसभा में तारक प्रश्नों के जवाब में गृहमंत्रालय के तरफ से गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले दस सालों में, 2014 से 1 दिसंबर 2025 तक, कुल 1734 आम लोगों की मौत हुई, 598 सुरक्षा बल शहीद हुए, 16336 वामपंथी उग्रवादी गिरफ्तार हुए, 9588 वामपंथी उग्रवादियों ने सरेंडर किया।
गृहमंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब में न केवल बीते छह वर्षों में सुरक्षा बलों की उपलब्धियां सामने रखी गईं, बल्कि यह भी स्पष्ट किया गया कि वामपंथी उग्रवाद अब अपने अंतिम चरणों में है। मंत्रालय ने बताया कि माओवादी न संविधान पर भरोसा करते हैं और न ही लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को स्वीकार करते हैं, यही कारण है कि वर्षों से उन्होंने आम लोगों को निशाना बनाते हुए हजारों परिवारों को उजाड़ दिया।
सदन में पेश जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों की लगातार और सटीक कार्रवाई के कारण माओवादी संगठनों की क्षमताएँ काफी हद तक नष्ट हो चुकी हैं। जून 2019 से अब तक 29 शीर्ष नक्सली नेताओं को न्यूट्रलाइज किया गया है, जिनमें 14 को इसी वर्ष ढेर किया गया। 2019 से अब तक 1,106 उग्रवादी मारे गए, 7,311 गिरफ्तार किए गए और 5,571 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण करते हुए मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना। गृहमंत्रालय ने यह भी बताया कि अब नक्सली पहले जैसी ताकत नहीं बचाए हुए हैं और सुरक्षा बलों से मुकाबले की उनकी क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है।
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सरकार ने माओवादियों के आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित करने के लिए विस्तृत पुनर्वास नीति लागू की है। इस योजना के तहत उच्च कैडर के उग्रवादियों को 5 लाख रुपये, अन्य कैडर को 2.5 लाख रुपये और हथियार के साथ सरेंडर करने वालों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाती है। पुनर्वास अवधि में तीन वर्षों तक 10,000 रुपये मासिक वजीफा भी उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही, राज्यों को भी अपनी पुनर्वास नीतियां गठित करने के लिए प्रेरित किया गया है, जिनमें बच्चों की शिक्षा, घायलों और दिव्यांगों को राहत, महिलाओं के लिए आजीविका सहायता और पुलिस सहयोगियों को नौकरी व भूमि में विशेष वरीयता शामिल हैं। केवल इस वर्ष ही 2,167 माओवादी पुनर्वास योजना का लाभ लेकर सामान्य जीवन में लौट चुके हैं।
सरकार ने सदन में बताया कि वामपंथी उग्रवाद की जड़ें 1967 से शुरू हुई थीं, और एक समय ऐसा था जब पशुपतिनाथ से तिरुपति तक का विस्तृत क्षेत्र रेड कॉरिडोर के नाम से भय का केंद्र माना जाता था, लेकिन अब यह इलाका काफी सिमट चुका है। सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के नेतृत्व में तैयार व्यापक रणनीति के कारण मार्च 2026 तक नक्सल उग्रवाद देश से पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। गृहमंत्रालय ने यह भी कहा कि पहले की सरकारें इस समस्या को केवल राज्यों का विषय मानती रहीं, जिसके कारण कोई राष्ट्रीय नीति नहीं बन पाई, वहीं 2015 में मोदी सरकार ने “Whole of Government Approach” अपनाते हुए सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर सामरिक रणनीति लागू की।
















