नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र (Winter Session Row) शुरू होते ही बिहार की सियासत एक बार फिर दिल्ली तक सुर्खियों में आ गई है। SIR (Special Investigation Report) को लेकर विपक्ष की रणनीति और सदन के बार-बार ठप होने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और बिहार की प्रमुख पार्टियों के नेताओं के तीखे बयान सामने आए हैं। JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा से लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और LJP(रामविलास) के सांसदों ने विपक्ष पर सदन की गरिमा भंग करने का आरोप लगाया है। इन बयानों ने न केवल दिल्ली बल्कि पटना की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।
संजय कुमार झा ने विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा कि पिछले सत्र की तरह इस बार भी SIR के नाम पर गैर-जरूरी हंगामा खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही और किसी भी राजनीतिक दल ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की शिकायत नहीं की। झा का आरोप है कि विपक्ष के पास मुद्दों का अभाव है, इसलिए संसद को वॉशआउट कर अपनी असफलता छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में विपक्ष को जनता ने नकारा है और आने वाले चुनावों में परिणाम पहले से अधिक स्पष्ट होंगे।
केंद्रीय मंत्री और LJP(रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है, लेकिन विपक्ष बिना तर्क के संसद को ठप कर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बाधित कर रहा है। चिराग ने कहा कि संसद बहस और नीति निर्माण की जगह है, न कि राजनीतिक हंगामे का मंच। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विपक्ष का ऐसा रवैया जनता और संसदीय परंपराओं दोनों के साथ अन्याय है।
उधर, LJP(रामविलास) की युवा सांसद शांभवी चौधरी ने संसद की गरिमा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यही वह स्थान है जहां देश की नीतियां बनती हैं और जनता के मुद्दों पर चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को इसलिए चुनकर भेजती है ताकि उनकी आवाज सदन में उठाई जा सके, लेकिन लगातार हंगामे से लोकतंत्र की भावना कमजोर होती है।
LJP(रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने भी इसी स्वर में कहा कि नागरिकों की उम्मीदें संसद से जुड़ी होती हैं। जब सदन चलेगा तभी देशहित में निर्णय लिए जा सकेंगे। उनका कहना था कि संसद को चलने देना सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है।






















