IRCTC AI Predictor: ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग के दौरान तेजी दिखाने या शॉर्टकट अपनाने की आदत अब यात्रियों को महंगी पड़ सकती है। भारतीय रेलवे ने अपनी आधिकारिक टिकटिंग वेबसाइट Indian Railway Catering and Tourism Corporation पर एआई आधारित नया ‘प्रीडिक्टर सिस्टम’ लागू कर दिया है, जो यह तय करेगा कि टिकट इंसान बुक कर रहा है या किसी ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर यूजर आईडी को ब्लॉक करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक यह कदम खासतौर पर उन दलालों और एजेंट नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है, जो अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए कन्फर्म टिकट हासिल कर आम यात्रियों को वेटिंग में छोड़ देते थे। रेलवे का दावा है कि नई तकनीक लागू होने के बाद आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना लगभग 40 फीसदी तक बढ़ सकती है।
दरअसल, एआई प्रीडिक्टर सिस्टम टिकट बुकिंग के दौरान यूजर की टाइपिंग स्पीड, फॉर्म भरने के पैटर्न और लॉगिन गतिविधियों का रियल टाइम विश्लेषण करता है। यदि पांच यात्रियों का नाम, उम्र और जेंडर जैसी जानकारी 4.2 सेकेंड से भी कम समय में दर्ज होती है तो सिस्टम इसे असामान्य मानकर ‘रेड फ्लैग’ कर सकता है। इसी तरह कट-पेस्ट, ऑटो-फिल या बॉट आधारित टूल्स का उपयोग भी संदिग्ध व्यवहार की श्रेणी में रखा गया है।
तकनीकी निगरानी यहीं नहीं रुकती। यदि कोई यूजर आधे घंटे के भीतर पांच बार से अधिक लॉगिन या लॉगआउट करता है, तो उसकी आईडी को 24 घंटे के लिए अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जा सकता है। इसके अलावा आईपी एड्रेस और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की लोकेशन में बड़ा अंतर मिलने पर भी ट्रांजेक्शन को रोका जा सकता है। पिछले एक महीने में करीब 2.8 लाख संदिग्ध अकाउंट ब्लॉक किए जाने की जानकारी सामने आई है, जो बताता है कि रेलवे इस बार सख्ती के मूड में है।



















