बिहार के जमुई जिले में शनिवार रात हुई मालगाड़ी दुर्घटना (Jamui Malgadi Accident) अब केवल एक तकनीकी घटना नहीं रह गई है, बल्कि इसने पूरे पूर्वी भारत के रेल संचालन पर गहरा असर डाल दिया है. झाझा–जसीडीह रेलखंड पर स्थित टेलवा हॉल्ट के पास सीमेंट लदी मालगाड़ी के पटरी से उतरने के बाद से रेलवे की व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हैं. हादसे के दो दिन बीत जाने के बावजूद भी घटनास्थल से मलबा पूरी तरह नहीं हटाया जा सका है, जिस कारण इस अहम रेल लाइन पर ट्रेनों का परिचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है.
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इस दुर्घटना में मालगाड़ी के 19 डिब्बे बेपटरी हो गए थे, जिनमें से कई डिब्बे ट्रैक पर और आसपास के इलाके में बिखर गए. राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन परिचालन के लिहाज से यह दुर्घटना बेहद गंभीर साबित हो रही है. झाझा–जसीडीह सेक्शन पूर्वी रेलवे के उन मार्गों में शामिल है, जो बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ते हैं. ऐसे में यहां रेल यातायात ठप होने का सीधा असर लंबी दूरी की ट्रेनों और रोजमर्रा के यात्रियों पर पड़ा है.
मालगाड़ी हादसे के कारण भारतीय रेलवे को मजबूरन कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है. सियालदह–बलिया एक्सप्रेस, मोकामा–हावड़ा एक्सप्रेस, जसीडीह–मोकामा मेमू, किउल–जसीडीह मेमू, देवघर–झाझा मेमू, झाझा–देवघर मेमू, मोकामा–जसीडीह मेमू, झाझा–जसीडीह मेमू, जसीडीह–बैद्यनाथधाम मेमू, बैद्यनाथधाम–जसीडीह मेमू, झाझा–पटना मेमू, जसीडीह–झाझा मेमू और जसीडीह–किउल मेमू जैसी कई पैसेंजर और मेमू सेवाएं पूरी तरह से कैंसिल कर दी गई हैं. इससे स्थानीय यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जो रोजाना इन ट्रेनों पर निर्भर रहते हैं.
सिर्फ ट्रेन रद्द ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी की कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के रूट भी बदल दिए गए हैं. जसीडीह–पुणे वीकली एक्सप्रेस, आरा–कोलकाता गरीब रथ एक्सप्रेस, थावे–टाटानगर एक्सप्रेस, टाटानगर–बक्सर एक्सप्रेस, कोलकाता–दरभंगा एक्सप्रेस, दरभंगा–कोलकाता एक्सप्रेस, जयनगर–कोलकाता वीकली एक्सप्रेस, जयनगर–सियालदह गंगासागर एक्सप्रेस, बलिया–सियालदह एक्सप्रेस, रक्सौल–हावड़ा मिथिला एक्सप्रेस और गोरखपुर–कोलकाता पूर्वांचल एक्सप्रेस को वैकल्पिक मार्गों से चलाया जा रहा है. इसके अलावा देवघर–पटना मेमू का परिचालन फिलहाल झाझा तक ही सीमित कर दिया गया है.
रेलवे प्रशासन का कहना है कि पटना से हावड़ा, दिल्ली, रांची और अन्य बड़े शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनों को डायवर्ट किए जाने से यात्रियों के सफर का समय बढ़ गया है. हालांकि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए ही यह फैसला लिया गया है. घटनास्थल पर रेलवे की टीमें युद्धस्तर पर बहाली कार्य में जुटी हुई हैं. भारी क्रेन, हाइड्रोलिक मशीनों और तकनीकी स्टाफ की मदद से बेपटरी डिब्बों को हटाया जा रहा है और क्षतिग्रस्त ट्रैक को दुरुस्त किया जा रहा है.
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जब तक ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक इस रूट पर परिचालन शुरू नहीं किया जाएगा. इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि व्यस्त रेलखंडों पर मालगाड़ियों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा मानकों की निगरानी कितनी जरूरी है. फिलहाल यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी अवश्य ले लें, क्योंकि झाझा–जसीडीह सेक्शन पर हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है.






















