बिहार की राजधानी पटना में जदयू ने रविवार 26 नवंबर को भीम संसद का आयोजन किया है। इस कार्यक्रम को सीएम नीतीश कुमार भी संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम के जरिए नीतीश कुमार राज्य के अनुसूचित जाति के वोटरों को साधने की कोशिश करेंगे। पटना के वेटनरी कॉलेज मैदान में 26 नवंबर को आयोजित होने वाले भीम संसद में पूरे प्रदेश से दलित समुदाय के लोग शिरकत करेंगे। भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में दलितों के विषय पर विमर्श होगा।
दलितों को लुभाने की तैयारी
दरअसल, बिहार में दलितों की संख्या अच्छी खासी है। यही कारण है कि हर दल इस वर्ग को अपने साथ रखना चाहता है। रामविलास पासवान के बाद दलितों के नेता के तौर पर उभरे चिराग पासवान को इस भीम संसद से टेंशन हो सकती है क्योंकि जदयू से उनकी अदावत पुरानी है। अगर जदयू दलितों को जोड़ेगा तो नुकसान चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे नेताओं को होगा। जाति गणना के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में अनुसूचित जाति यानी दलित एवं महादलित वर्ग की आबादी 19.65 फीसदी है। राज्य में पासवान यानी दुसाध, यादव के बाद दूसरी सबसे बड़ी जाति है। कुल आबादी में पासवान का हिस्सा करीब 5 फीसदी है। इसके अलावा 3 फीसदी लोग मुसहर समाज से हैं। ये दोनों ही जातियां महादलित वर्ग में आती है। अनुसूचित जाति के वोटर बिहार की राजनीति में मायने रखते हैं।
हालांकि, इस सम्मेलन के बाद यह पता चलेगा कि दलित इस भीम संसद से कितने प्रभावित हुए हैं।




















