Chetan Anand Organ Donation: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक ऐसी पहल ने नई बहस छेड़ दी है, जो सीधे तौर पर सामाजिक जिम्मेदारी और इंसानी संवेदना से जुड़ी है। जेडीयू विधायक चेतन आनंद ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर अंगदान का संकल्प लेकर राज्य के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई मिसाल पेश कर दी है। यह निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि पिछले दिनों परिवार में लगातार हुई मौतों और गंभीर बीमारियों ने उनके सोचने के तरीके को बदल दिया। एक इंटरव्यू में चेतन आनंद कहते हैं कि लोग रक्तदान से भी कतराते हैं, ऐसे में अंगदान को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है।
चेतन आनंद के अनुसार, पिछले कुछ ही समय में उनके परिवार में कई गहरे सदमे लगे। पहले उनकी मौसी का निधन, फिर बड़े भाई (जिन्हें लोग पम्पम भैया के नाम से जानते थे) का असमय जाना, इसके बाद दो चाचा गंभीर बीमारी से जूझते हुए अस्पताल में भर्ती हो गए और अंततः एक अन्य बुजुर्ग रिश्तेदार की मृत्यु ने परिवार को हिला दिया। चेतन आनंद बताते हैं कि जब लगातार ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं तो यह अहसास होता है कि किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटने के बाद कितनी मजबूरियां सामने आती होंगी। इन्हीं अनुभवों ने उनके भीतर यह भाव पैदा किया कि यदि मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी भरी जा सकती है, तो उससे बड़ा कोई पुण्य नहीं।
चेतन आनंद का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में गंभीर बीमारी या ऑर्गन फेल्योर के मामले में अंग प्राप्त करना चुनौती बन जाता है। अधिकतर मरीज दाता की कमी के कारण इलाज से वंचित रह जाते हैं। इस स्थिति ने उन्हें और उनकी पत्नी को यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। चेतन आनंद बताते हैं कि वह नेता के रूप में भी यही संदेश देना चाहते हैं कि सामाजिक जिम्मेदारी केवल भाषणों से नहीं, बल्कि फैसलों से दिखती है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे चाहते हैं कि बिहार के अन्य 242 विधायक भी इस तरह का निर्णय लें, तो उन्होंने साफ कहा कि प्रेरणा जनता को दी जा सकती है, नेताओं को नहीं। हर व्यक्ति का अपना फैसला होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि मरणोपरांत किसी की जिंदगी बचा देना सबसे बड़ा उपकार है और यह हर नागरिक को समझने की जरूरत है।
उन्होंने राजद की पूर्व सांसद रोहिणी आचार्य का भी जिक्र किया, जिन्होंने अपने पिता के लिए जीते जी किडनी दान कर मिसाल कायम की थी। चेतन आनंद ने कहा कि व्यक्तिगत जीवन की परिस्थितियाँ अलग-अलग होती हैं, लेकिन दान का निर्णय हमेशा साहस और इंसानियत का परिचायक होता है।
परिवारिक विवादों को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने संयम से कहा कि किसी के निजी मसलों पर टिप्पणी करना उचित नहीं, पर यह भी जोड़ा कि परिवार को बैठकर समाधान निकालना चाहिए और एक अभिभावक के रूप में लालू प्रसाद यादव को इसमें पहल करनी चाहिए।
चुनावी चर्चा पर बात करते हुए चेतन आनंद ने अपने हालिया विधानसभा चुनाव के रोमांचक नतीजों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अंतिम राउंड में जब वे 57 वोट से पीछे थे, तभी उन्हें भरोसा था कि अगले बूथ से उन्हें निर्णायक समर्थन मिलेगा, और वही हुआ। उन्होंने कहा कि नवीन नगर की जनता पर उन्हें हमेशा भरोसा था और जनता ने उन्हें निराश नहीं किया।
जब उनसे मंत्री पद की संभावना पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह उनका नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व का विषय है। जिम्मेदारी मिलेगी तो निभाई जाएगी, पर पद पाने की इच्छा रखना उनकी सोच नहीं।
अंत में चेतन आनंद ने दोहराया कि अंगदान का फैसला उन्होंने मानवता और समाज के प्रति कर्तव्य के तौर पर लिया है ताकि बिहार में ऑर्गन डोनेशन को लेकर जागरूकता बढ़े और लोगों को यह भरोसा मिले कि जीवन का मूल्य मृत्यु के बाद भी किसी न किसी रूप में कायम रह सकता है।






















