राज्य में महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण को एक साथ साधने वाला ‘जीविका मॉडल’ (Bihar Jeevika Model) अब नए चरण में प्रवेश कर चुका है। आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को जीविका दीदियों द्वारा सिली हुई पोशाक देने की पहल के बाद अब यही मॉडल प्रारंभिक विद्यालयों तक ले जाने की तैयारी है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने संकेत दिया है कि कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को भी जीविका समूहों के स्तर पर तैयार पोशाक उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार को भी मजबूती मिलेगी।
रविवार को शहर स्थित दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में यह पहल सार्वजनिक मंच पर सामने आई। इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी के साथ मिलकर मंत्री श्रवण कुमार ने आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को जीविका दीदियों द्वारा तैयार की गई पोशाक का वितरण किया। कार्यक्रम का माहौल केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि इसमें नीति, भावनाएं और भविष्य की दिशा तीनों एक साथ दिखाई दीं।
मंत्री श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया कि इस योजना को अगले स्तर तक ले जाने के लिए शिक्षा विभाग से समन्वय किया जाएगा। उन्होंने अपने विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार को निर्देश दिया कि शिक्षा विभाग के साथ शीघ्र उच्च स्तरीय बैठक आयोजित कर इस पर अंतिम निर्णय लिया जाए। यह संकेत है कि सरकार इस पहल को प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि संस्थागत रूप देना चाहती है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न केंद्रों से आए छोटे–छोटे बच्चों को जब पोशाक की थैली सौंपी गई, तो उनकी खुशी देखते ही बनती थी। आरोही, आदित्य, कार्तिक, खुशी, कृतिका, पीहू, रौशनी, अमन और विवेक जैसे बच्चों के चेहरे पर उत्साह साफ झलक रहा था। दिलचस्प यह रहा कि बच्चों से ज्यादा खुशी उन मंत्रियों और अधिकारियों के चेहरे पर दिखी, जो इस योजना को जमीन पर उतरते देख रहे थे।
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ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि हाल ही में स्वरोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत जीविका समूहों से जुड़ी करीब 1 करोड़ 54 लाख दीदियों को 10–10 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है। जिन महिलाओं ने इस राशि का उपयोग सिलाई मशीन खरीदने के लिए किया है, उन्हें समूह बनाकर पोशाक निर्माण से जोड़ा जाएगा। फिलहाल राज्य में लगभग एक लाख महिलाएं 1050 केंद्रों के माध्यम से इस कार्य में लगी हैं और आने वाले समय में यह संख्या बढ़कर पांच लाख से अधिक होने की संभावना है।
यही कारण है कि सरकार अब स्कूल के बच्चों की पोशाक को भी इसी मॉडल से जोड़ने पर विचार कर रही है। इससे न केवल बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और समय पर पोशाक मिलेगी, बल्कि महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्थायी आजीविका के अवसर भी पैदा होंगे। मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने के संकल्प को यह पहल ठोस आधार प्रदान करेगी।
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उन्होंने जीविका की पृष्ठभूमि को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2006 में विश्व बैंक के सहयोग से शुरू हुई यह योजना आज राज्य की सामाजिक और आर्थिक प्रगति का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। वर्तमान में 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से 1 करोड़ 40 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये समूह न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अब यह प्रभाव केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है। शहरी इलाकों की महिलाएं भी बड़ी संख्या में जीविका से जुड़ने की कोशिश कर रही हैं, जो इस मॉडल की स्वीकार्यता और संभावनाओं को दर्शाता है। आंगनवाड़ी से प्राथमिक विद्यालय तक पोशाक वितरण का यह विस्तार संकेत देता है कि सरकार विकास और रोजगार को अलग-अलग नहीं, बल्कि एकीकृत दृष्टिकोण से देख रही है।






















