Jharkhand Politics: बिहार चुनाव के नतीजों ने एक ओर जहां राष्ट्रीय राजनीति का सुर बदल दिया है, वहीं इसका असर अब पड़ोसी राज्य झारखंड की सत्ता पर भी पड़ता दिख रहा है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल की बड़ी हार के तुरंत बाद झारखंड की राजनीति में भी असामान्य हलचल महसूस की जा रही है। इसका संकेत भाजपा नेता अजय आलोक के उस ट्वीट से भी मिल रहा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि “अब नया बम झारखंड में, हेमंत अब जीवंत होंगे।”
यह ट्वीट झारखंड के मौजूदा समीकरणों की ओर संकेत करता है। फिलहाल विधानसभा में किसी प्रकार की अस्थिरता नहीं है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी सरकार को लेकर सुरक्षित स्थिति में हैं, लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म है कि वे अपने मंत्रिमंडल में एक बड़े फेरबदल की तैयारी में हैं।
सबसे अधिक चर्चित नाम राजद के मंत्री संजय कुमार यादव का है, जिन्हें हेमंत सोरेन कैबिनेट से बाहर किए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। दरअसल, बिहार में राजद की कमजोर होती स्थिति और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर तेजस्वी यादव की ओर से की गई अनदेखी, दोनों ही कारक झारखंड में इस बदलते समीकरण की वजह बन सकते हैं।
बिहार चुनाव के समय हेमंत सोरेन ने तेजस्वी यादव से अपनी पार्टी के लिए सीटों की मांग की थी। लेकिन तेजस्वी ने उनकी बात को तवज्जो नहीं दी। अब जब बिहार में राजद को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है, तो झारखंड में हेमंत सोरेन के सामने यह सवाल मजबूती से खड़ा है कि राजद को सत्ता में हिस्सेदारी जारी रखकर उन्हें क्या राजनीतिक लाभ मिल रहा है?
चर्चा यह भी है कि हेमंत सोरेन संभवतः बिहार चुनाव का इंतजार कर रहे थे। यदि राजद अच्छा प्रदर्शन करती तो झारखंड में उनके साथ गठबंधन बनाए रखने का नैरेटिव मजबूत होता, लेकिन अब स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री किसी भी समय कैबिनेट रिकंस्ट्रक्शन का ऐलान कर सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अगर राजद को मंत्रिमंडल से बाहर भी कर दिया जाए, तब भी हेमंत सोरेन सरकार पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ेगा। झारखंड विधानसभा में राजद के केवल चार विधायक हैं और उनके समर्थन के बिना भी जेएमएम, कांग्रेस और वामदलों के पास आराम से बहुमत बरकरार रहता है।






















