[Team insider] राज्य में हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार पर संकट के बादल छाने लगे हैं। राज्य में स्थानीयता नीति का सवाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गले की हड्डी बन गई है। वही भाषा नीति पर पहले से ही सरकाए संकट में फंसी हुई है। भाषा को लेकर जहां कांग्रेस कोटे के मंत्री बन्ना गुप्ता लगातार सरकार के खिलाफ बयान देते रहे हैं। तो वही सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा का अंतर कलह सामने आ गया है जो सरकार की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है।
JMM विधायक अपने ही सरकार पर हमलावर
एक ओर जहां सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक अपने ही सरकार पर लगातार हमलावर हैं। जेएमएम विधायकों के बीच आपस मे ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी पर सरकार को अस्थिर करने के आरोप लग रहे है। वहीं विधानसभा बजट सत्र के दौरान जेएमएम के विधायक लोबिन हेंब्रम ने 1932 की खतियान को लेकर सरकार पर ही हमला बोला और अब इसको लेकर रैली कर रहे हैं। तो वही जेएमएम विधायक स्टीफन मरांडी ने सीता सोरेन और लिबिन हेम्ब्रम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
इतना ही नहीं जामा से जेएमएम विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन ने अपनी ही सरकार पर जमीन लूट और सरकार द्वारा भ्रष्ट पदाधिकारियों को संरक्षण देने के आरोप लगाए है।इन तमाम पहलुओं को देख यह कहा जा सकता है कि सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
पार्टी की छवि हो रही है धूमिल
जेएमएम के वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी ने पार्टी विधायक लोबिन हेंब्रम और सीता सोरेन पर पार्टी विरोधी काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि नेता द्वारा भाजपा के इशारे पर पार्टी के खिलाफ काम किया जा रहा हैं। इससे पार्टी की छवि धूमिल तो हो ही रही है और लोगों के बीच गलत संदेश भी जा रहा है। यहां तक कि अनुशासनात्मक कार्यवाई होने की बात कही है।
कांग्रेस के विधायकों की भी सरकार से नाराजगी सामने आती रही

वहीं दूसरी ओर महागठबंधन सरकार की घटक दल कांग्रेस के विधायकों की भी अपनी ही सरकार से नाराजगी सामने आती रही है। भाषा विवाद पर कांग्रेस कोटे से मंत्री बन्ना गुप्ता लगातार भाषा नीति पर सरकार के खिलाफ हमलावर रहे हैं। सरकारी नौकरियों में भोजपुरी मगही, अंगिका और मैथिली को शामिल नहीं करने को लेकर सरकार के प्रति उन्होंने गुस्सा भी जाहिर की थी। उन्होंने यहां तक धमकी दे डाली थी कि भाषा की अस्मिता के लिए उन्हें मंत्री पद से 100 बार भी इस्तीफा देना पड़े तो तैयार हैं।
सरकार को अस्थिर करने को लेकर हुई थी 3 लोगों की गिरफ्तारी
इससे पहले भी सरकार को अस्थिर करने को लेकर 3 लोगों की गिरफ्तारी की गई थी। उनके पास से भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ था। इस मामले में कांग्रेस कोटे से बेरमो विधायक अनूप सिंह ने थाने में जाकर शिकायत दर्ज भी करवाई थी। ऐसे में कहीं ना कहीं कांग्रेस विधायकों को अपने प्रदेश अध्यक्ष पर भी भरोसा नहीं रहा था। जिसकी वजह से मामला थाने तक पहुंचा। हालांकि इसको लेकर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने सीधे तौर पर भाजपा पर सरकार को अस्थिर करने के आरोप लगाये है।