[Team insider] समय के पहले मौसम की ब़ढ़ती तपिश का असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ रहा है। कांग्रेस के चार विधायकों पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष डॉ इरफान अंसारी, उमा शंकर अकेला, राजेश कच्छप और नमन विक्सल कोंगाड़ी ने बगावत का झंडा बुलंद किया। इरफान अंसारी के नेतृत्व में जेएससीए स्टेडियम में गुरुवार को बैठक हुई थी। इनका कहना था कि कांग्रेस कोटे के चारों मंत्री नकारा हैं।
विधायकों ने नये प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय को भी निशाने पर लिया और कहा कि वे गंभीर नहीं हैं। इन विधायकों की बैठक के तीन दिन पहले ही प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय ने दिल्ली में बम फोड़ा था। कहा था कि गठबंधन की सरकार को अकेले नहीं चलाया जा सकता। हेमन्त सोरेन को नसीहत दी थी कि जल्द से जल्द कॉमन मीनिमन प्रोग्राम लागू करें।
कांग्रेस के कई विधायक हेमन्त के काफी करीबी
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है कि क्या इन दोनों घटना क्रम में आपस में गंभीर रिश्ता है। बहरहाल बगावती सुर लेकर जो चार विधायक सामने आये उनमें तीन पहले से सरकार गिराने की साजिश को लेकर चर्चा में थे। माना जाता है कि इन विधायकों के हेमन्त से करीबी रिश्ते हैं। वैसे कुछ और कांग्रेस के विधायक हैं जो हेमन्त के काफी करीबी हैं।
कांग्रेस के अंदरखाने में चर्चा तेज है कि तत्काल ऐसा कुछ नहीं हुआ था जिसे लेकर चारों विधायक अचानक इतना आक्रामक हो जायें। इन विधायकों ने तो अपने साथ 10-12 विधायकों के होने का दावा किया। यानी पार्टी को तोड़ने की ताकत का एहसास कराया। कांग्रेस के 18 विधायकों में बंधु तिर्की की सदस्यता हाल ही जा चुकी है। एक महिला विधायक के खिलाफ भी गंभीर मामला है। जाहिर है कांग्रेस के लिए बागियों के समर्थन का यह आंकड़ा परेशान करने वाला है।
पिछले साल सरकार गिराने की साजिश का हुआ था फंडाफोड़
पिछले साल सरकार गिराने की साजिश का फंडाफोड़ हुआ था तो उसमें कांग्रेस के जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी, बरही से कांग्रेस विधायक उमाशंकर अकेला और करकट्ठा से निर्दलीय विधायक अमित यादव का नाम सामने आया था। पकड़े गये पलामू के अभिषेक दुबे ने जुलाई रांची पुलिस को स्वीकारोक्ति बयान में कहा था कि उनके साथ तीन विधायक दिल्ली गये थे। सरकार गिराने की साजिश के मामले में पकड़े गये, अमित सिंह की तस्वीर जब जब सोशल मीडिया पर कांग्रेस विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी की तस्वीर वायरल हुई तो कोंगाड़ी की सफाई आई थी कि सरकार गिराने के लिए जनवरी माह में ही उन्हें मंत्री पद और दूसरे ऑफर मिले थे। उन्होंने इसकी सूचना मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव को दी थी।
पांचवीं यात्रा में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से मिलने गये
ताजा विवाद में ये तीनों कांग्रेसी विधायक ज्यादा सक्रिय हैं। जहां तक कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय की हेमन्त को नसीहत का सवाल है तो बिहार की कमान संभालने के बाद अविनाश पांडेय अपने तेवर में रहे। रांची की पांचवीं यात्रा में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से मिलने गये। वह भी विधायकों, मंत्रियों और पार्टी जनों के साथ बैठक के बाद कॉमन मीनिमन प्रोग्राम का मसौदा पकड़ाने। अविनाश पांडेय के आते ही कांग्रेस आलाकमान ने सरकार से समन्वय के लिए 17 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी मगर आज तक झामुमो की ओर से कोई पहल नहीं हुई। सवा दो साल से अधिक हो गये मगर कॉमन मीनिमन प्रोग्राम तक नहीं बना।
कांग्रेस के विधायक मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से भी मिले थे
प्रभारी अविनाश पांडेय द्वारा हेमन्त सोरेन को इसका मसविदा सौंपे जाने के बाद भी उधर से कोई पहल नहीं हुई तो कांग्रेस दबाव पर उतर आई। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि कांग्रेस विधायकों के बगावत के पीछे झामुमो की योजना तो नहीं। वैसे बैठक के बाद ये चारों विधायक मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से भी मिले थे। नाराज विधायक अपनी संख्या बढ़ाते हुए दिल्ली दरबार में दस्तक देने वाले हैं। अब समय बतायेगा कि कांग्रेस पहले अपना घर बचाती है या हेमन्त सरकार पर दबाव बढ़ाती है। गौर करने वाली बात यह भी है कि कांग्रेस में दबाव की राजनीति करने और दल बदल के लिए जरूरी, दो तिहाई विधायकों का समर्थन का दावा वाले विधायकों में ऐसे कम ही लोग हैं जिन्हें झामुमो अधिक भाजपा है।
भाजपा लगातार आक्रमण कर ही रही है
सधे हुए पत्ते फेंकने और दूसरों को घेरने में माहिर हेमन्त हाल के दिनों में खुद घिरा हुआ महसूस कर रहे थे। भाजपा लगातार आक्रमण तो कर ही रही है राज्यपाल ने भी एजेंडा वाले तीन विधेयकों को राज्य सरकार को वापस कर कठघरे में खड़ा कर दिया है। वहीं घर से भी बगावत की आवाज उठ रही है। मामला सीता सोरेन का हो या पार्टी के वरिष्ठ नेता लोबिन हेंब्रम का। सीता सोरेन के मामले में राज्य सरकार ने संज्ञान नहीं लिया तो राष्ट्रपति भवन से आम्रपाली परियोजना में कार्रवाई का निर्देश आ गया। सरना कोड और भाषा विवाद सहित अन्य मुद्दों पर दूसरों पर आक्रमण करने वाले हेमन्त वर्तमान हालात में बैकफुट पर दिख रहे थे। कांग्रेस विधायकों के ताजा असंतोष से तत्काल हेमन्त सोरेन तो थोड़ा राहत की सांस जरूर ले रहे होंगे।