बिहार की राजनीति में बयान और उनके मायने अक्सर बहस का विषय बन जाते हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) का हालिया स्पष्टीकरण भी कुछ ऐसा ही है, जिसने उनके पुराने बयान को एक नए कोण से देखने की ज़रूरत पैदा कर दी है। चुनाव से जुड़े उनके कथित बयान को लेकर विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच मांझी ने स्पष्ट किया है कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उनके कहने का आशय कुछ और ही था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि किसी प्रशासनिक मशीनरी के सहारे चुनाव जितवाया गया। उनके अनुसार, उन्होंने केवल यह संदर्भ दिया था कि यदि उस समय रिकाउंटिंग की मांग की जाती तो नतीजा अलग हो सकता था। मांझी ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने यह नहीं कहा कि चुनाव “मिशनरी” या किसी गलत तरीके से जीता गया, बल्कि यह बात पूरी तरह से काल्पनिक व्याख्या है, जिसे राजनीतिक लाभ के लिए फैलाया जा रहा है।
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मांझी ने इस पूरे विवाद की जिम्मेदारी प्रत्याशी अनिल कुमार पर डालते हुए कहा कि अगर वह मौके पर मौजूद रहते और नियमों के तहत रिकाउंटिंग की मांग करते, तो चुनाव का परिणाम उनके पक्ष में आ सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्याशी का वहां से चले जाना एक बड़ी चूक थी, जिसकी वजह से स्थिति हाथ से निकल गई। इस बयान के जरिए मांझी ने न केवल अपने पुराने शब्दों को नए संदर्भ में रखा, बल्कि यह भी संकेत दिया कि चुनावी प्रक्रियाओं में नियमों का पालन कितना निर्णायक होता है।
केंद्रीय मंत्री ने प्रशासनिक प्रक्रिया और ईवीएम पर भरोसा जताते हुए यह भी स्पष्ट किया कि मशीनरी में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं थी। उनके मुताबिक, चुनावी तंत्र पर सवाल उठाना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है और इस तरह की बातें केवल भ्रम फैलाने का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर उनके बयान को घुमा-फिरा कर पेश कर रहे हैं ताकि राजनीतिक माहौल को गरमाया जा सके।






















