देश की न्यायिक व्यवस्था को तकनीक और आधुनिक बुनियादी ढांचे से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उस समय देखने को मिला, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत (CJI Justice Suryakant Bihar) दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर बिहार पहुंचे। दौरे के दूसरे दिन पटना हाईकोर्ट परिसर में उनका कार्यक्रम केवल औपचारिक नहीं रहा, बल्कि यह बिहार की न्यायिक कार्यप्रणाली के भविष्य की झलक भी लेकर आया।

पटना हाईकोर्ट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने लगभग 302.56 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन यानी एडीआर बिल्डिंग और आधुनिक ऑडिटोरियम, नया प्रशासनिक ब्लॉक, मल्टी लेवल पार्किंग, अत्याधुनिक आईटी बिल्डिंग, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय परिसर और एक समर्पित हॉस्पिटल बिल्डिंग शामिल हैं। यह निवेश सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर अदालतों की कार्यक्षमता, न्यायिक अधिकारियों के कार्य वातावरण और आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ेगा।
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न्यायिक तंत्र पर बढ़ते मामलों के दबाव के बीच इन परियोजनाओं को समय की मांग माना जा रहा है। बेहतर पार्किंग व्यवस्था, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार से न केवल अदालतों का संचालन अधिक सुचारु होगा, बल्कि वकीलों और वादकारियों को भी राहत मिलेगी। जानकारों का मानना है कि पटना हाईकोर्ट का यह विस्तार बिहार को देश के आधुनिक न्यायिक परिसरों की कतार में खड़ा कर सकता है।

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने इस अवसर पर “e-ACR Nyay” नामक एक नए डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उद्घाटन किया। यह प्लेटफॉर्म न्यायिक अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट यानी एसीआर प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम पहल है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में समय की बचत के साथ-साथ मानवीय हस्तक्षेप और कागजी औपचारिकताओं में भी कमी आएगी। डिजिटल इंडिया और ई-कोर्ट्स मिशन के अनुरूप इस पहल को न्यायिक सुधारों की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
पटना के बाहर भी सीजेआई का कार्यक्रम उतना ही महत्वपूर्ण है। गया में न्यायाधीशों के लिए तैयार किए गए नए गेस्ट हाउस का वर्चुअल उद्घाटन और पुनपुन के पोठही में बिहार ज्यूडिशियल अकादमी के नए परिसर के लिए भूमि पूजन और आधारशिला समारोह उनके दौरे का हिस्सा है। यह संकेत देता है कि न्यायिक सुधार केवल राजधानी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य में समान रूप से लागू करने की कोशिश की जा रही है।
इसके अलावा चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पटना के वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर जस्टिस सूर्यकांत कानून के छात्रों को संबोधित करेंगे। न्यायिक सेवा, संविधानिक मूल्यों और व्यावहारिक अनुभवों पर उनका संबोधन युवा विधि छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है।
















