बिहार की राजनीति में एक बार फिर कर्पूरी ठाकुर (Karpoori Thakur Politics) की विरासत केंद्र में आ गई है। भारत रत्न से सम्मानित जननायक कर्पूरी ठाकुर को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयानों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए बिहार की सामाजिक न्याय की राजनीति, पिछड़े और दलित वर्गों की आकांक्षाएं और सत्ता बनाम विपक्ष की वैचारिक लड़ाई खुलकर सामने आ रही है।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने तेजस्वी यादव के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कर्पूरी ठाकुर को बिहार का सच्चा सपूत बताया। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने ईमानदारी, सादगी और सबका साथ, सबका विकास के मूल मंत्र के साथ राजनीति को नई दिशा दी। उनके अनुसार प्रधानमंत्री द्वारा भारत रत्न से सम्मानित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि देश ने सही मायने में एक योग्य व्यक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया है। विजय सिन्हा ने इस मौके पर राष्ट्रीय जनता दल के अतीत की ओर इशारा करते हुए यह सवाल भी खड़ा किया कि विपक्ष के नेता के परिवार ने कभी कर्पूरी ठाकुर और उनके विचारों को किस नजर से देखा था और किस तरह दलितों व पिछड़े वर्गों को हतोत्साहित किया गया।
दूसरी ओर तेजस्वी यादव ने कर्पूरी ठाकुर की विरासत को सरकार के खिलाफ हथियार बनाते हुए कहा कि जननायक का सपना आज भी अधूरा है। उनके मुताबिक बिहार में गरीबी, बेरोजगारी और पलायन जैसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन सरकार को इनसे कोई सरोकार नहीं है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि पिछले दो दशकों से सत्ता में वही लोग हैं जो कभी कर्पूरी ठाकुर के विचारों का विरोध करते थे और उन्हें अपमानित करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार कुछ खास वर्गों की बात करती है, सबकी नहीं, और संविधान व लोकतंत्र को कमजोर करने की मानसिकता के साथ काम कर रही है।






















