एनडीए में शामिल जनता दल यूनाइटेड के कोटे से सांसद कौशलेंद्र कुमार ने बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के निर्माण को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक बहस को नई दिशा दे दी है। उन्होंने साफ कहा कि भारत एक संवैधानिक देश है, जहां हर नागरिक को समान अधिकार प्राप्त हैं और इसमें धर्म के आधार पर भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

नालंदा में मीडिया से बातचीत के दौरान जदयू सांसद ने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद का निर्माण होता है तो यह संविधान के दायरे में एक स्वाभाविक और वैध प्रक्रिया है। उनके मुताबिक, जो लोग उस धर्म को मानते हैं, उनके लिए यह एक सकारात्मक कदम हो सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संविधान हर नागरिक को न सिर्फ जीने का अधिकार देता है, बल्कि अपने धर्म का पालन करने और उसे मानने की पूरी स्वतंत्रता भी देता है।
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कौशलेंद्र कुमार ने ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर भी संतुलित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बाबर को उन्होंने कभी देखा नहीं है, बल्कि इतिहास की पुस्तकों में ही उसके बारे में पढ़ा है, इसलिए किसी ऐतिहासिक चरित्र पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना उन्हें उचित नहीं लगता। उन्होंने दो टूक कहा कि आज़ादी के बाद जब देश ने संवैधानिक व्यवस्था को अपनाया, तब से सभी समुदायों को समान अधिकार मिले और उसी आधार पर किसी भी धार्मिक संरचना के निर्माण या आस्था से जुड़ी गतिविधियों को देखा जाना चाहिए।
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इस बयान का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के नाम पर चल रही चर्चाओं ने वहां की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को भी असहज कर दिया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने ही विधायक हुमायूं कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया, जिससे साफ है कि यह मुद्दा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सीधा-सीधा राजनीतिक संतुलन से जुड़ गया है। जदयू सांसद का बयान ऐसे समय में आया है, जब एनडीए, विपक्ष और क्षेत्रीय दल सभी संवेदनशील मुद्दों पर बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं।





















