नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आज लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पेश किया। इस विधेयक के तहत वक्फ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल में अब गैर-मुस्लिम सदस्यों और महिलाओं को भी शामिल करने का प्रावधान किया गया है। इस कदम को अल्पसंख्यक समुदाय के बीच समावेशिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। रिजिजू ने सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा, “अब वक्फ बोर्ड में शिया, सुन्नी, बोहरा, पिछड़े मुसलमान, महिलाएं और विशेषज्ञ गैर-मुस्लिम भी होंगे। मैं इसे विस्तार से समझाना चाहता हूं। मैं खुद का उदाहरण देता हूं- मैं मुसलमान नहीं हूं, लेकिन अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री हूं। अगर मैं सेंट्रल वक्फ काउंसिल का चेयरमैन बनता हूं, तो मेरे पद के बावजूद काउंसिल में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से दो महिलाएं होना अनिवार्य है।”
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के मुख्य प्रावधान
- वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान।
- सेंट्रल वक्फ काउंसिल में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य होंगे, जिसमें दो महिलाएं अनिवार्य।
- वक्फ संपत्ति बनाने के लिए व्यक्ति को कम से कम पांच साल तक इस्लाम का पालन करने वाला होना जरूरी।
- राज्य सरकार को वक्फ बोर्ड में सांसदों, विधायकों और बार काउंसिल के सदस्यों में से एक-एक व्यक्ति को नामित करने का अधिकार।
विवाद और चर्चा
यह विधेयक पहले भी चर्चा में रहा है। अगस्त 2024 में इसे पहली बार पेश किया गया था, जिसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया। समिति को अब तक 8 लाख याचिकाएं मिल चुकी हैं, जो इस विधेयक को लेकर जनता और संस्थानों की चिंताओं को दर्शाती हैं। कुछ विपक्षी दलों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताकर इसका विरोध किया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता और समावेशिता लाने के लिए है।
रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “यह विधेयक किसी की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करता। हम उन लोगों को अधिकार देना चाहते हैं, जिन्हें पहले कभी ये अधिकार नहीं मिले।” उन्होंने यह भी बताया कि कई सांसदों ने वक्फ बोर्ड में माफिया के प्रभाव की शिकायत की थी, जिसके बाद यह सुधार लाया गया।
वक्फ कानून का इतिहास
वक्फ कानून 1913 से अस्तित्व में है और समय-समय पर इसमें संशोधन हुए हैं। 2013 में वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन कर गैर-मुस्लिमों को भी वक्फ संपत्ति बनाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन 2024 के विधेयक में इसे फिर से बदलकर यह शर्त जोड़ दी गई कि वक्फ बनाने वाला व्यक्ति कम से कम पांच साल से इस्लाम का पालन करने वाला होना चाहिए।
रिजिजू का व्यक्तिगत उदाहरण
अरुणाचल प्रदेश से सांसद और बौद्ध धर्म को मानने वाले किरेन रिजिजू ने अपने अनुभव के जरिए इस विधेयक की जरूरत को रेखांकित किया। 2024 से अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रूप में कार्यरत रिजिजू ने कहा कि उनकी गैर-मुस्लिम पृष्ठभूमि के बावजूद वह इस मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे हैं, और इसी तरह वक्फ बोर्ड में भी विविधता लाने की जरूरत है। यह विधेयक अब सदन में चर्चा के बाद आगे की प्रक्रिया के लिए जाएगा। इस बीच, इस पर जनता और विभिन्न संगठनों की राय जानने के लिए और विचार-विमर्श की संभावना है।