नई दिल्ली: संसद में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर चर्चा के दौरान जबरदस्त बहस छिड़ी रही। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस विधेयक को बेवजह “मुस्लिम विरोधी” बताने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि वक्फ कोई धार्मिक संस्था नहीं है, बल्कि एक प्रशासनिक निकाय है जो मुसलमानों के कल्याण के लिए काम करता है। ऐसे में इसमें पारदर्शिता लाने के प्रयासों का विरोध क्यों किया जा रहा है?
क्या है वक्फ संशोधन विधेयक 2025?
सरकार का दावा है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और बेहतर प्रबंधन के लिए लाया गया है। इसमें जिलाधिकारियों (DM) को अधिकार दिया गया है कि वे वक्फ संपत्तियों पर नजर रखें, ताकि कोई अनियमितता न हो। साथ ही, वक्फ ट्रस्ट की आमदनी सही जगह खर्च हो, इस पर भी निगरानी रखी जाएगी।
विपक्ष के आरोप और ललन सिंह का जवाब
विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर सरकार पर ‘वक्फ बोर्ड के अधिकारों को कमजोर करने’ और ‘मुस्लिम विरोधी एजेंडा’ चलाने का आरोप लगाया। इस पर ललन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर पारदर्शिता लाने के प्रयास किए जा रहे हैं तो इसमें परेशानी क्या है? या फिर विपक्ष को दिक्कत इस बात से है कि उनका ‘गिरोह’ अब वक्फ संपत्तियों पर कब्जा नहीं जमा पाएगा? उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग वोट बैंक की राजनीति करते हैं, वही लोग इस कानून के खिलाफ हैं।
मोदी सरकार पर भरोसा या संदेह?
ललन सिंह ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार मुसलमानों के विकास और पारदर्शिता में यकीन रखती है। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि आपको मोदी जी का चेहरा पसंद नहीं, ठीक है, मत देखिए। लेकिन उनके अच्छे कामों की सराहना तो करिए! उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2013 में कांग्रेस सरकार ने जो ‘गलत कानून’ बनाए थे, उसे अब मोदी सरकार ठीक कर रही है।
पसमांदा मुसलमानों के हक की बात
ललन सिंह ने एक और बड़ा मुद्दा उठाया—पसमांदा मुसलमानों का हक। उन्होंने कहा कि विपक्ष की राजनीति केवल प्रभावशाली मुस्लिम समुदाय तक सीमित रही है, जबकि गरीब, पिछड़े और अति पिछड़े मुसलमानों को उनका अधिकार नहीं मिला। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि आप पूरे देश में एक भी उदाहरण दे दीजिए, जहां पसमांदा मुसलमानों को वक्फ से कोई लाभ मिला हो?
उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में किए गए कार्यों का उदाहरण दिया और कहा कि एनडीए सरकार ने भागलपुर दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाया, कब्रिस्तानों की घेराबंदी करवाई, और मुस्लिम महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं चलाईं।
ट्रिब्यूनल विवाद और नया कानून
इस विधेयक में ट्रिब्यूनल से जुड़े प्रावधानों को भी संशोधित किया गया है। पहले, यदि कोई संपत्ति वक्फ घोषित कर दी जाती थी, तो उसे चुनौती देना लगभग असंभव हो जाता था। अब नए कानून में दोनों पक्षों को बराबर का मौका दिया गया है।
ललन सिंह ने तंज किया कि पहले ट्रिब्यूनल में सालों-साल मामला लटका रहता था और फैसला हमेशा वक्फ बोर्ड के पक्ष में जाता था। अब पारदर्शी व्यवस्था लाई जा रही है, तो आपको दिक्कत हो रही है?
कांग्रेस और विपक्ष की ‘सेक्युलरिज्म’ पर सवाल
ललन सिंह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस का सेक्युलरिज्म केवल वोट बैंक की राजनीति तक सीमित है। कांग्रेस के नेताओं को अब तय करना होगा कि वे देश के संविधान के साथ हैं या फिर अपने राजनीतिक लाभ के लिए समाज को बांटते रहेंगे!
अंत में, JDU का समर्थन
जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इस विधेयक का पूरा समर्थन किया और कहा कि यह विधेयक वास्तव में मुसलमानों के कल्याण और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है।