लालू प्रसाद यादव (Lalu Yadav Returns to Patna) और उनका परिवार इन दिनों लगातार सुर्खियों में है। एक ओर राउज एवेन्यू कोर्ट ने नौकरी के बदले जमीन मामले में पूरे लालू परिवार पर आरोप तय कर बड़ी कानूनी चुनौती खड़ी कर दी है, वहीं परिवार के भीतर मतभेद और नाराजगी का दौर भी खत्म होता नजर नहीं आ रहा। ऐसे तनावपूर्ण माहौल के बीच राजद सुप्रीमो लालू यादव शनिवार को दिल्ली से पटना रवाना हो गए। वे पिछले कुछ सप्ताह से इलाज और राजनीतिक चर्चाओं के चलते दिल्ली में रुके थे, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद दिल्ली में उनकी मौजूदगी को सियासी संकेत के तौर पर देखा जा रहा था। अब उनका पटना लौटना पार्टी की नई सक्रियता और रणनीतिक बदलावों से जोड़ा जा रहा है।
दिल्ली प्रवास के दौरान लालू यादव से उनके छोटे बेटे और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुलाकात की। विदेश यात्रा से लौटते ही तेजस्वी सीधे दिल्ली पहुंचे और पिता से संगठन, पार्टी के प्रदर्शन व भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि दोनों नेताओं के बीच चुनावी हार के कारणों, संगठनात्मक कमजोरी और पार्टी विस्तार को लेकर गंभीर बातचीत हुई। माना जा रहा है कि राजद को फिर से संघर्ष की स्थिति से उबारने के लिए निर्णायक कदम उठाने की तैयारी हो रही है।
इसी दौरान तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव की भी दिल्ली में पिता से मुलाकात ने खूब ध्यान खींचा। इतना ही नहीं दिल्ली कोर्ट में तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव भही आमने-सामने आए, पर दोनों भाईयों में कोई बात नहीं हुई। विधानसभा चुनाव से पहले एक युवती के साथ वायरल तस्वीर के बाद तेज प्रताप को लालू परिवार व पार्टी से बाहर कर दिया गया था। विवाद के बाद यह पहली मुलाकात थी, जिसे सामाजिक और भावनात्मक दृष्टि से अहम माना गया। तेज प्रताप ने लालू यादव को दही-चूड़ा भोज के लिए आमंत्रित किया, जिससे संकेत मिला कि परिवार के भीतर संवाद की कोशिश जारी है, भले ही मतभेद गहरे हों।
दूसरी तरफ लालू परिवार में जारी मनमुटाव का एक नया पहलू तब सामने आया जब रोहिणी आचार्य ने शनिवार को सोशल मीडिया पर फिर से तेजस्वी यादव के सलाहकार संजय यादव पर निशाना साधा। रोहिणी ने लिखा कि बड़ी मेहनत से बनाई गई विरासत को नष्ट करने के लिए बाहरी नहीं, बल्कि अपने ही काफी होते हैं। उन्होंने इस पोस्ट के जरिए यह संकेत दिया कि पार्टी और परिवार की पहचान को नुकसान पहुंचाने का काम भीतर के लोग ही कर रहे हैं। रोहिणी के तंज से यह साफ झलकता है कि परिवार के भीतर असहमति और अविश्वास की स्थिति अब भी जारी है।
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लालू यादव के पटना लौटने से यह सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है कि क्या वे पार्टी में बड़े बदलावों की ओर बढ़ेंगे या पारिवारिक मतभेद को सुलझाने पर पहले ध्यान देंगे। कानूनी मोर्चे पर बढ़ती दिक्कतों, राजनीतिक क्षरण और पारिवारिक विवादों के बीच लालू परिवार की आने वाली राजनीतिक दिशा सिर्फ बिहार की ही नहीं, पूरे देश की नजर में है।






















