लोकसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में लोकसभा चुनाव का मंच अब सजने लगा है। सीट बंटवारे को लेकर एक तरफ जहां कुछ नेताओं में खुशी है तो वहीं कुछ नेताओं को पार्टी ने दर किनार कर दिया है। ऐसे में अब कई नेता अपना दल बदल रहे हैं। इस बीच जमशेदपुर संसदीय सीट पर BJP ने वर्तमान सांसद विद्युतवरण महतो पर फिर से भरोसा जताते हुए प्रत्याशी घोषित कर दिया है। अब वहां महागठबंधन को प्रत्याशी ढूंढना पड़ रहा है। अब हजारीबाग की बात करें तो वहां से भाजपा से आकर जेपी पटेल टिकट ले उड़े और अंबा प्रसाद इंतजार में बैठी ही रह गईं।
दरअसल, जमशेदपुर संसदीय सीट पर कांग्रेस से लड़कर इस सीट को लेनेवाले झामुमो के पास कद्दावर चेहरा नहीं है। पिछली बार यहां से झामुमो ने चंपाई सोरेन को खड़ा किया था। चंपाई अभी मुख्यमंत्री हैं। महतो बहुल जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र में झामुमो का जनाधार भी है, लेकिन कद्दावर प्रत्याशी नहीं है। यही कारण है कि झामुमो BJP के कुणाल षाड़ंगी पर डोरे डाल रहा है। वहीं, कई नेता भी टिकट की चाह में हैं लेकिन पार्टी उन्हें धक्का देती जा रही है।
गोड्डा में भी कांग्रेस के कई नेताओं के साथ यही स्थिति होनेवाली है। वहां कांग्रेस में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। लेकिन, टिकट प्रदीप यादव, दीपिका सिंह पांडेय, फुरकान अंसारी में से किसी एक को ही मिलनेवाला है। अन्य दावेदारों को टिकट नहीं मिलने पर संतोष करना पड़ेगा। इसी को लेकर कई नेता नाराज हो जा रहे हैं, और वे अपना दल बदलना शुरू कर दे रहे हैं।
रांची से सांसद रह चुके रामटहल चौधरी भी चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर, कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया, तो वे रांची से चुनाव लड़ेंगे। लेकिन निर्दलीय नहीं। मालूम हो कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया था। उनकी जगह संजय सेठ को उतारा था। इसी गुस्से में रामटहल चौधरी निर्दलीय चुनाव लड़ गए थे। हालांकि, उस चुनाव में उन्हें बहुत कम वोट मिले थे। इसकी वजह से वे हार गए थे। अब वे कांग्रेस से आस लगाए बैठे हैं।




















