15 फरवरी को महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2026 Patna) के अवसर पर पटना में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। राजधानी पटना के प्रमुख नदी घाटों और सार्वजनिक स्थलों पर इस बार व्यवस्था पहले से ज्यादा सख्त और तकनीक-आधारित होगी। प्रशासनिक रणनीति का फोकस केवल भीड़ नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी किनारे होने वाली धार्मिक गतिविधियों के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की रोकथाम, त्वरित रेस्क्यू और ट्रैफिक संचालन को एकीकृत कमांड सिस्टम से संचालित करने पर है।
जिला प्रशासन ने नदी घाटों को कई सेक्टरों में विभाजित कर हर सेक्टर में मोटर बोट, लाइफ जैकेट, प्रशिक्षित गोताखोर और जवानों की तैनाती सुनिश्चित की है। सात विशेष आपदा प्रतिक्रिया दलों को घाटों पर तैनात कर दिया गया है ताकि डूबने या अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियों में मिनटों के भीतर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जा सके। प्रशासन का मानना है कि पिछले वर्षों में धार्मिक आयोजनों के दौरान नदी घाटों पर होने वाली छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़े हादसों का कारण बनी हैं, इसलिए इस बार ‘रिस्क-ज़ीरो अप्रोच’ अपनाई गई है।
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भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी प्रशासन ने बहुस्तरीय व्यवस्था बनाई है। दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, स्पेशल मोबाइल टीम और रिवर पेट्रोलिंग यूनिट को संवेदनशील स्थलों पर तैनात किया गया है। ड्रोन के जरिए भीड़ के दबाव, ट्रैफिक फ्लो और घाटों पर गतिविधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके। अनुमंडल स्तर के अधिकारी सतत भ्रमणशील रहकर फील्ड से सीधे कंट्रोल रूम को फीडबैक देंगे, जिससे निर्णय लेने में देरी न हो।
नदियों में निजी नावों के परिचालन पर इस दिन सख्त पाबंदी लगाई गई है। केवल सरकारी कार्यों में लगी नावों को ही अनुमति होगी। प्रशासन का तर्क है कि अनधिकृत नावों की मौजूदगी से दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ता है और आपात स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन बाधित हो सकता है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी ताकि त्योहार की आड़ में कोई भी सुरक्षा मानकों से समझौता न कर सके।
सार्वजनिक स्थलों पर यातायात संचालन के लिए रूट डायवर्जन और पार्किंग प्रबंधन की भी विशेष योजना बनाई गई है ताकि मंदिरों और घाटों की ओर जाने वाले मार्गों पर जाम न लगे। प्रशासन का आकलन है कि महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की संख्या में अचानक बढ़ोतरी होती है, इसलिए भीड़ के दबाव को फैलाने के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कराया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस और मोबाइल पेट्रोलिंग टीम को प्वाइंट-टू-प्वाइंट तैनाती दी गई है, जिससे इमरजेंसी वाहनों को निर्बाध रास्ता मिल सके।
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या आपात स्थिति की सूचना तुरंत 24×7 जिला नियंत्रण कक्ष, जिला आपातकालीन संचालन केंद्र या आपात सेवा 112 पर दें। अधिकारियों का कहना है कि त्योहार का आनंद तभी सुरक्षित है जब नागरिक भी प्रशासन के साथ सहयोग करें, नियमों का पालन करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
















