Maharashtra Nikay Chunav: महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति की धारा देश की मुख्य राजनीतिक धारा से अलग नहीं बह रही है। शिर्डी संस्थान के पूर्व ट्रस्टी और योगायतन ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन डॉ. राजेंद्र प्रताप सिंह का मानना है कि महाराष्ट्र का मतदाता बेहद प्रबुद्ध है और उसने भावनात्मक या विभाजनकारी राजनीति के बजाय स्थिरता और विकास को तरजीह दी है। भाषा, क्षेत्र और संकीर्ण पहचान की राजनीति को नकारते हुए जनता ने एक बार फिर स्पष्ट संकेत दिया है कि उसे काम करने वाली सरकार चाहिए।
डॉ. राजेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका बहुआयामी वोट बैंक है। पार्टी के पास राष्ट्रवादी सोच रखने वाला वर्ग, हिंदुत्व से जुड़ा मतदाता और मजबूत स्थानीय समर्थन तीनों मौजूद हैं। यही वजह है कि भाजपा केवल एक वर्ग या मुद्दे पर निर्भर नहीं दिखती, बल्कि अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक सेक्टर में उसकी पकड़ बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व और जमीनी संगठन ने पार्टी को नगर निकाय चुनावों में निर्णायक बढ़त दिलाई।
लोकसभा चुनाव में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के बाद भाजपा ने आत्ममंथन किया और अपनी रणनीति में जरूरी बदलाव किए। विधानसभा चुनाव और फिर नगर निकाय चुनावों में पार्टी ने यह दिखा दिया कि वह अपनी गलतियों से सीखती है और उन्हें दोहराने से बचती है। इस बार चुनाव प्रचार में बड़े राष्ट्रीय चेहरों के बजाय राज्य नेतृत्व पर भरोसा किया गया। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा ने स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और प्रशासनिक स्थिरता को केंद्र में रखा।
मुंबई जैसे महानगर में हुए विकास कार्यों को भाजपा ने बिना शोर-शराबे के जनता के सामने रखा। प्रचार में न तो भाषा का मुद्दा उछाला गया और न ही क्षेत्रीय अस्मिता को भड़काने की कोशिश की गई। डबल इंजन सरकार का लाभ बताते हुए यह संदेश दिया गया कि केंद्र और राज्य की मशीनरी एक दिशा में काम कर रही है। डॉ. राजेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि महाराष्ट्र की जनता समझदार है, वह यह देखती है कि कौन विकास की बात करता है और कौन सिर्फ राजनीति करता है।





















