पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी और राजनीतिक बयानबाज़ी ने नया मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee Pen Drive) ने कोलकाता में एक विशाल जनसभा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए दावा किया कि उनके पास ऐसा डिजिटल सबूत मौजूद है, जिसे सार्वजनिक कर दिया जाए तो राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच सकती है। उनका दावा है कि इस सबूत में कोयला घोटाले से जुड़े संवेदनशील डेटा और कथित राजनीतिक कनेक्शन दर्ज हैं।
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया कि वह चुनावों के ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी संस्थाओं का राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि ईडी की ताजा छापेमारी का लक्ष्य भ्रष्टाचार की जांच नहीं बल्कि उनकी पार्टी की चुनावी तैयारियों को नुकसान पहुंचाना और गोपनीय रणनीति दस्तावेजों को कब्जे में लेना था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दबाव बढ़ाया गया तो वे अपनी पेन ड्राइव में मौजूद कोयला घोटाले से संबंधित गंभीर जानकारी सामने रख देंगी, जिससे राजनीतिक भूचाल आना तय है।
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मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा दिल्ली स्थित भाजपा नेतृत्व पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कोयला मामले का धन राज्य से निकलकर दिल्ली तक पहुंचा है और उन्हें इस मामले से जुड़े ठोस सबूत प्राप्त हैं। मंच से उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब राज्य की सीमाओं पर केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात हैं, तब बड़े पैमाने पर कोयले की तस्करी कैसे संभव है। उनका तंज था कि यह मामला केवल बंगाल का नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र की जांच का विषय है।
हालिया विवाद तब उभरा जब 8 जनवरी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और कोयला घोटाले की जांच में तृणमूल से जुड़े आई-पैक के दफ्तर पर छापा मारा। ईडी का दावा था कि एक संगठन अवैध धन को घुमाने में शामिल है और उसका आई-पैक से करोड़ों रुपये का लिंक मिला है। घटनाक्रम के दौरान ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और कुछ दस्तावेज व डिजिटल स्टोरेज अपने साथ ले गईं। उनका कहना था कि यह सामग्री पार्टी की चुनावी रणनीति से जुड़ी है और किसी भी एजेंसी को इसे कब्जे में लेने का अधिकार नहीं है।
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उन्होंने अपने भाषण को लोकतंत्र बनाम सत्ता संघर्ष के रूप में पेश किया और कहा कि यह विरोध केंद्र के अहंकार और अन्याय के खिलाफ है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का हवाला देकर उन्होंने कहा कि बंगाल की सड़कें अब जवाब देंगी और जनता इस लड़ाई में साथ खड़ी होगी। ममता बनर्जी ने साफ संकेत दिया कि यदि केंद्र उन्हें चुप कराने की कोशिश करेगा तो यह लड़ाई और आक्रामक होगी।






















