Mangal Pandey Sunil Singh clash: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उस वक्त माहौल अचानक गर्म हो गया जब स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चल रही चर्चा निजी आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मेडिकल कॉलेजों और इलाज की सुविधाओं को लेकर बहस हो रही थी, तभी मंगल पांडेय और सुनील सिंह के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बहस इस कदर आगे बढ़ी कि व्यक्तिगत संदर्भ सामने आ गए और सदन में कुछ देर के लिए शोर-शराबे का माहौल बन गया।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब इलाज के लिए दिल्ली के एम्स जाने के मुद्दे पर सवाल उठाया गया। विपक्ष की ओर से यह कहा गया कि जब बिहार में 25 मेडिकल कॉलेज होने का दावा किया जा रहा है, तो फिर बड़े नेता इलाज के लिए दिल्ली क्यों जाते हैं। इसी संदर्भ में मुख्य सचेतक के इलाज का उदाहरण सामने आया, जिसे लेकर सत्ता पक्ष ने पलटवार किया। जवाब में कहा गया कि बिहार के अस्पतालों की व्यवस्था विश्वसनीय है और जरूरत पड़ने पर नेता पटना में ही इलाज कराते हैं।
इसी बहस के दौरान सुनील सिंह की ओर से मंगल पांडेय की पत्नी का नाम लिए जाने पर विवाद और तेज हो गया। मंगल पांडेय ने आपत्ति जताते हुए कहा कि राजनीतिक बहस में परिवार को घसीटना अनुचित है और यह संसदीय मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि “मेरी पत्नी का नाम क्यों लिया गया?” इस सवाल के साथ ही सदन में भावनात्मक और राजनीतिक तनाव दोनों बढ़ गया।
सत्ता पक्ष का तर्क था कि इलाज दिल्ली में कराना किसी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर अविश्वास का संकेत नहीं है, बल्कि कई बार व्यक्तिगत कारणों और डॉक्टरों की विशेषज्ञता के चलते लोग बाहर जाते हैं। वहीं विपक्ष ने इसे सरकार के स्वास्थ्य ढांचे की कमजोरी से जोड़ते हुए कहा कि अगर राज्य में सब कुछ बेहतर है तो नेताओं को बाहर जाने की जरूरत क्यों पड़ती है। इस बहस ने बिहार की मेडिकल सुविधाओं, मेडिकल कॉलेजों की संख्या और जमीनी हकीकत को लेकर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया।






















