हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मनोज वाजपेयी जब अपने पैतृक गांव पहुंचे, तो पूरे इलाके में उत्साह और गर्व की लहर दौड़ गई। अपने बेहतरीन अभिनय और संजीदा किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले मनोज वाजपेयी न केवल बॉलीवुड के चमकते सितारे हैं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने की मिसाल भी पेश करते हैं। इस विजिट के दौरान मनोज वाजपेयी भितिहरवा आश्रम जीवन कौशल ट्रस्ट द्वारा संचालित आश्रम भी पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत और सम्मान किया गया।
गांधी-कस्तूरबा को दी श्रद्धांजलि, जड़ों से जुड़ने का संदेश
भितिहरवा आश्रम का ऐतिहासिक महत्व सिर्फ बिहार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गहरा है। महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह का यह पवित्र स्थल संघर्ष, सेवा और समाज सुधार की प्रेरणा देता है। मनोज वाजपेयी ने इस दौरान महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

अपने संबोधन में उन्होंने गांधीवादी मूल्यों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि गांधी जी के विचारों को आगे बढ़ाता यह आश्रम केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज भी हमें सत्य, अहिंसा और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाता है।
समाजसेवा के प्रति झुकाव, सिर्फ सिनेमा तक सीमित नहीं
इस खास कार्यक्रम में ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप सिंह, सचिव प्रो. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष राकेश राव, और बिहार राज्य मुखिया संघ के उपाध्यक्ष नितेश राव भी उपस्थित रहे। ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे समाजसेवी कार्यों को देखकर मनोज वाजपेयी बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने आश्रम की गतिविधियों की सराहना की।

मनोज वाजपेयी: गांव की मिट्टी से जुड़ा एक सितारा
मनोज वाजपेयी हमेशा से अपनी मूल पहचान और बिहार की विरासत से जुड़े रहे हैं। गांव से निकलकर मायानगरी मुंबई में एक बड़ा नाम बनाने के बावजूद, उनका दिल अपनी जड़ों से कभी नहीं हटा। इस दौरे के दौरान उन्होंने न केवल अपने गांव के लोगों से मुलाकात की, बल्कि शिक्षा, सामाजिक विकास और युवाओं के भविष्य पर भी बातचीत की।