मनरेगा का नाम बदलकर (MGNREGA name change) ‘वीबी जी राम जी’ किए जाने के प्रस्ताव ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने इसे सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि ग्रामीण अधिकारों, संवैधानिक सोच और गांधीवादी मूल्यों पर सीधा हमला बताया है। शनिवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ किया कि कांग्रेस इस फैसले के विरोध में सड़कों पर उतरेगी और इसे जनआंदोलन का रूप देगी।

खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार को गांधी सरनेम से आपत्ति है, इसलिए मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाया जा रहा है। उनके मुताबिक यह कदम उस ऐतिहासिक योजना की आत्मा को कमजोर करता है, जिसने देश के करोड़ों गरीब परिवारों को रोजगार के साथ सम्मान और सुरक्षा दी। कांग्रेस का दावा है कि यूपीए सरकार के दौरान बने इस कानून ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल दिया और संकट के समय लाखों परिवारों का जीवन बचाया।
राहुल गांधी ने फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कैबिनेट या राज्यों से परामर्श किए बिना लिया गया यह निर्णय ‘वन मैन शो’ की मिसाल है। उनके अनुसार मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि राइट बेस्ड कॉन्सेप्ट था, जिसने न्यूनतम मजदूरी की गारंटी देकर गरीबों को अधिकार दिए। राहुल ने आरोप लगाया कि इस बदलाव से लाभ कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को हो रहा है, जबकि नुकसान सीधे ग्रामीण भारत को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों से संसाधन छीनकर केंद्र में समेटना शक्ति और वित्त का केंद्रीकरण है, जो संघीय ढांचे के विपरीत है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को भी लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की साजिश बताया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करें कि गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से न हटें। कांग्रेस के मुताबिक ये सभी कदम मिलकर लोकतंत्र को कमजोर करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
दिल्ली में हुई CWC बैठक को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि यह बिहार चुनाव में हार के बाद पहली बड़ी बैठक थी। इसमें कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष शामिल हुए। शशि थरूर की मौजूदगी भी चर्चा में रही, जो पिछली दो बैठकों में अनुपस्थित थे। बैठक में सरकार के खिलाफ रणनीति, ‘जी राम जी’ बिल और आगामी आंदोलनों पर गहन मंथन हुआ।
खड़गे ने बैठक से पहले मनरेगा को यूपीए सरकार की दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि इसकी सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई, इसलिए इसे महात्मा गांधी के नाम से जोड़ा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार बिना अध्ययन और परामर्श के कानूनों को खत्म करने का पैटर्न अपना रही है, जैसा कि कृषि कानूनों के मामले में देखा गया था। जनविरोध के बाद सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा, यह उदाहरण लोकतांत्रिक दबाव की ताकत दिखाता है।
इसके अलावा खड़गे ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की निंदा की और देश में क्रिसमस समारोहों पर कथित हमलों को भारत की वैश्विक छवि के लिए नुकसानदायक बताया। कांग्रेस का कहना है कि सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए वह हर मोर्चे पर संघर्ष करेगी। मनरेगा के नाम परिवर्तन को लेकर छिड़ी यह लड़ाई आने वाले दिनों में केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर सकती है।






















