बिहार में अपराध अनुसंधान की तस्वीर बदलने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar launches) ने राज्य में फॉरेंसिक जांच प्रणाली को आधुनिक और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से 34 मोबाइल फॉरेंसिक लैब वाहनों को रवाना किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी ने सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया कि कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका को और मजबूत किया जा रहा है।

अब तक फॉरेंसिक टीमों को घटनास्थल पर पहुंचने के लिए स्थानीय थानों की गाड़ियों या अन्य अस्थायी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। इसका सीधा असर जांच की गति पर पड़ता था, क्योंकि समय पर मौके पर नहीं पहुंच पाने से कई अहम साक्ष्य नष्ट हो जाते थे या कमजोर पड़ जाते थे। नई मोबाइल फॉरेंसिक लैब व्यवस्था के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।

इन विशेष वाहनों में फॉरेंसिक जांच से जुड़े सभी आवश्यक और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे टीम सीधे घटनास्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटा सकेगी। इसका मतलब यह है कि अब अपराध के शुरुआती घंटों में ही फॉरेंसिक साक्ष्य सुरक्षित किए जा सकेंगे, जो किसी भी केस की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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सरकारी स्तर पर इस पहल को सिर्फ एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। तेज और सटीक फॉरेंसिक जांच से न केवल पुलिस अनुसंधान को मजबूती मिलेगी, बल्कि अदालतों में भी ठोस और वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकेंगे। इससे जहां निर्दोष लोगों को राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी, वहीं अपराधियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार करना आसान होगा। राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि हर जिले में फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और प्रभावी हो। मोबाइल फॉरेंसिक लैब की तैनाती से अपराध नियंत्रण के साथ-साथ जनता का भरोसा भी कानून-व्यवस्था पर मजबूत होगा।






















