मोतिहारी (Motihari Chunav VVPAT Scandal) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सुगौली विधानसभा क्षेत्र के नगर परिषद अंतर्गत अमीर खां टोला, वार्ड संख्या 12 स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, निमूई में बुधवार की सुबह हड़कंप मच गया। विद्यालय की रसोइया जब रोज़ की तरह रूम खोलने पहुंची तो देखा कि सैकड़ों VVPAT पर्चियां जमीन पर बिखरी पड़ी हैं।
यह वही विद्यालय है जहाँ बीते मंगलवार को दूसरे चरण का विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ था। ऐसे में मतदान के बाद इस तरह का दृश्य सामने आना न केवल निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि सुरक्षा मानकों की गंभीर चूक की ओर भी इशारा करता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि मतदान खत्म होने के बाद करीब शाम चार बजे कुछ अधिकारियों ने बड़ी लापरवाही दिखाते हुए VVPAT पर्चियों को प्लास्टिक बैग में भरकर पास की सिकरहना नदी में फेंक दिया। इस घटना की जानकारी जैसे ही इलाके में फैली, स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई।
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घटना की सूचना मिलते ही सदर एसडीएम श्वेता भारती और सुगौली प्रखंड विकास पदाधिकारी नूतन किरण तत्काल मौके पर पहुंचीं। उनके नेतृत्व में संबंधित विद्यालय के रूम का ताला खोला गया, जहाँ तीनों प्रमुख प्रत्याशियों की उपस्थिति में पर्चियों की जांच की गई। अधिकारियों ने बारीकी से जांच करते हुए सभी दस्तावेज़ों और VVPAT पर्चियों को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया है।
वहीं, इस मामले को लेकर कई उम्मीदवारों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और मांग की कि इस तरह की चुनावी लापरवाही पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। विपक्षी दलों का आरोप है कि यदि VVPAT पर्चियों की इस तरह से सुरक्षा नहीं की जा सकती, तो चुनाव की निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी?
फिलहाल प्रशासन जांच में जुट गया है और कहा जा रहा है कि पूरी घटना की रिपोर्ट जिला निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपी जाएगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद कौन से अधिकारी जिम्मेदार ठहराए जाते हैं और इस गंभीर चूक के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।






















