राबड़ी देवी के सरकारी आवास (Mukesh Sahni on Rabri Awas) को खाली कराने के मुद्दे पर जेडीयू की दलीलों और आरोपों के बीच वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने एनडीए सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बोलने वाले बहुत लोग हैं, लेकिन राबड़ी आवास के भीतर तहखाना होने जैसी बातें महज राजनीतिक बयानबाजी हैं, हकीकत से उनका कोई लेना-देना नहीं है। सहनी ने कहा कि मौजूदा सरकार के पास न तो कोई विजन है और न ही जनता के हित में काम करने की इच्छाशक्ति।
मुकेश सहनी ने कहा कि आज सरकार का ध्यान शासन और विकास से हटकर लोगों को घर से बेघर करने पर केंद्रित हो गया है। चाहे आम जनता हो, गरीब हो या फिर विपक्ष का कोई नेता, सबको परेशान किया जा रहा है। ठंड के मौसम में गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह अमानवीय है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति अवैध रूप से रह रहा है तो सबसे पहले सरकार की जिम्मेदारी है कि उसे रहने के लिए आशियाना दे, उसके बाद ही किसी तरह की कार्रवाई करे।
राबड़ी देवी के मामले पर सहनी ने याद दिलाया कि वह पिछले दो दशकों से उसी आवास में रह रही हैं। ऐसे में उन्हें अचानक परेशान करना न तो संवैधानिक है और न ही नैतिक। उन्होंने कहा कि सरकार का काम विपक्ष को डराना या दबाना नहीं, बल्कि जनता के हित में काम करना है। विपक्ष भी लोकतंत्र का अहम हिस्सा है और जब सरकार सत्ता के नशे में अंधी हो जाती है, तब उसे रास्ता दिखाने का काम विपक्ष ही करता है। सहनी ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार आज विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उनकी पार्टी डरने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास पावर है, जो करना है करे, लेकिन वीआईपी और विपक्ष झुकने वाले नहीं हैं।
आर्थिक हालात पर निशाना साधते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि बिहार की मौजूदा सरकार पैसे के दम पर बनी है और जनता के जनादेश की चोरी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 हजार रुपये बांटकर सरकार बनाई गई और अब जनता से किए गए वादों को निभाने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं। सहनी ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार के सामने हाथ फैलाकर मदद मांगनी पड़ रही है। हालात इतने खराब हैं कि अगर केंद्र से मदद नहीं मिली तो बिहार के कर्मचारी नया साल भी नहीं मना पाएंगे, क्योंकि राज्य सरकार के पास तनख्वाह देने के लिए भी पैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी।
रोपवे पुल के ध्वस्त होने के सवाल पर मुकेश सहनी ने कहा कि उन्हें इस घटना की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन इससे पहले भी बिहार में कई पुल और ब्रिज गिर चुके हैं। यह साफ तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तबीयत अस्वस्थ है और वह खुद फैसले लेने की स्थिति में नहीं हैं। अफसरशाही ही सरकार चला रही है और पूरे बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर है। ऐसे हालात में राज्य से किसी बेहतर उम्मीद की कल्पना करना भी मुश्किल है।
वहीं जीतन राम मांझी की नाराजगी और राज्यसभा सीट की मांग पर सहनी ने तंज कसते हुए कहा कि मांझी जी मीडिया में बने रहना चाहते हैं। उनका यह बयान सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है और साफ संकेत देता है कि एनडीए के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।




















