मुंबई की राजनीति (Mumbai BMC Election 2026) में लंबे समय से मराठी बनाम उत्तर भारतीय की बहस को हवा देने वाली सियासत को इस बार महानगर के मतदाताओं ने नए सिरे से परिभाषित कर दिया है। बीएमसी चुनाव के नतीजों ने साफ संकेत दिया कि अब मुंबई की राजनीति पहचान की संकीर्ण रेखाओं से बाहर निकलकर विकास, स्थिरता और साझी हिस्सेदारी की ओर बढ़ रही है। उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी के लिए पहचानी जाने वाली राज ठाकरे की राजनीति को मतदाताओं ने सिरे से खारिज कर दिया, जबकि प्रवासी समुदाय, खासकर बिहार और मिथिलांचल से जुड़े नेताओं ने निर्णायक जीत दर्ज कर यह संदेश दिया कि मुंबई किसी एक पहचान की बपौती नहीं, बल्कि सबकी साझी कर्मभूमि है।
बीएमसी के 227 वार्डों में हुए इस चुनाव में महाराष्ट्र की परंपरागत राजनीति के कई दावे कमजोर पड़ते दिखे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, जो मुंबई जैसे अहम शहरी निकाय में दमदार वापसी की उम्मीद लगाए बैठी थी, अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसके उलट भाजपा और शिंदे शिवसेना गठबंधन को जो मजबूती मिली, उसके पीछे प्रवासी मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रही। खास तौर पर पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों में उत्तर भारतीय और मैथिल मतदाताओं ने संगठित होकर वोट किया, जिसका सीधा असर नतीजों पर दिखा।
कांदिवली पूर्व के वार्ड 23 से भाजपा उम्मीदवार शिव कुमार झा की जीत इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बनकर सामने आई। करीब 5,400 मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज कर उन्होंने न सिर्फ तीसरी बार हैट्रिक पूरी की, बल्कि यह भी साबित किया कि प्रवासी समुदाय अब सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति बन चुका है। बिहार के मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी प्रखंड के गंगद्वार गांव से निकलकर मुंबई की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले शिव कुमार झा आज उत्तर भारतीय और मैथिल समाज के प्रभावशाली चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं। स्थानीय मराठी और प्रवासी मतदाताओं के साझा समर्थन ने उन्हें ‘अपनों का नेता’ बना दिया है।
इसी तरह मलाड, गोरेगांव, कांदिवली और कुर्ला-चांदीवली जैसे इलाकों में भी बिहार और उत्तर भारत से जुड़े नेताओं की जीत ने साफ कर दिया कि बीएमसी चुनाव अब केवल क्षेत्रीय भावनाओं का मुकाबला नहीं रह गया है। इन इलाकों में विकास कार्य, स्थानीय मुद्दों की समझ और जमीन से जुड़ी राजनीति ने पहचान आधारित नारों पर भारी पड़कर चुनावी समीकरण बदल दिए।
राज्य स्तर पर देखें तो भाजपा-शिंदे शिवसेना गठबंधन ने 114 से अधिक सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर बीएमसी पर नियंत्रण स्थापित किया है। भाजपा अकेले लगभग 89 वार्डों में जीत दर्ज कर रही है, जबकि शिंदे शिवसेना ने भी उल्लेखनीय हिस्सेदारी बनाई है। यह प्रदर्शन 2017 के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत माना जा रहा है और इससे मुंबई की नगर राजनीति में गठबंधन की पकड़ और गहरी हुई है।
















