Muzaffarpur Suicide News: मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र का नवलपुर मिश्रौलिया गांव सोमवार की अहले सुबह उस वक्त सन्नाटे में डूब गया, जब एक ही घर से चार लोगों की मौत की खबर सामने आई। गांव के मजदूर अमरनाथ राम ने अपनी तीन नाबालिग बेटियों के साथ फांसी लगाकर जान दे दी। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और अब सवाल यह उठ रहा है कि यह सामूहिक आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और रहस्य छिपा है।
ग्रामीणों के अनुसार, सुबह करीब चार बजे अमरनाथ राम के दोनों बेटे तेज-तेज रोने लगे। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग घर के भीतर पहुंचे तो वहां का मंजर देखकर सभी स्तब्ध रह गए। अमरनाथ राम अपनी तीन बेटियों अनुराधा, शिवानी और राधिका के साथ फंदे से लटके मिले। बेटियों की उम्र 8 से 14 साल के बीच बताई जा रही है। पिता और बेटियों की एक साथ मौत की खबर फैलते ही गांव में मातम पसर गया।
अमरनाथ राम पेशे से मजदूर थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनवरी महीने में उनकी पत्नी की मौत हो गई थी, जिसके बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। अमरनाथ राम कभी-कभार मजदूरी कर लेते थे, लेकिन नियमित आमदनी नहीं थी। जो भी थोड़ा-बहुत मिलता, उसी से घर चलता था। बड़ी बेटी ही घर का खाना बनाती थी और छोटे भाई-बहनों का ख्याल रखती थी। ग्रामीणों का मानना है कि आर्थिक तंगी और पारिवारिक दबाव ने अमरनाथ राम को इस भयावह कदम के लिए मजबूर किया होगा।
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घटना की सूचना मिलते ही सकरा थाना की पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। एफएसएल टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया है, ताकि हर पहलू की वैज्ञानिक जांच हो सके। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शवों की स्थिति को लेकर कुछ संदेह भी सामने आ रहा है, क्योंकि मृतकों के पैर जमीन से सटे हुए पाए गए हैं। इसी कारण यह मामला केवल आत्महत्या का है या इसमें किसी तरह की जबरदस्ती या हत्या की आशंका है, इस पर भी जांच की जा रही है।
मृतक के चाचा सीताराम ने बताया कि सुबह करीब साढ़े चार बजे बच्चों के रोने की आवाज सुनकर वे लोग उठे। अंदर जाकर देखा तो अमरनाथ राम तीन बेटियों के साथ फांसी पर लटका हुआ था। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमरनाथ अपने दोनों बेटों को भी फांसी लगाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वे किसी तरह वहां से भाग निकले और उनकी जान बच गई।
स्थानीय जनप्रतिनिधि ने भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि अमरनाथ राम के कुल पांच बच्चे थे, जिनमें तीन बेटियों की मौत हो गई और दो बेटे बच गए। उन्होंने बताया कि पत्नी की मौत के बाद अमरनाथ राम मानसिक रूप से भी टूट चुका था और दिनभर इधर-उधर भटकता रहता था। परिवार का गुजारा जैसे-तैसे हो रहा था, जो इस त्रासदी की पृष्ठभूमि को और भी गंभीर बनाता है।
फिलहाल पुलिस हर एंगल से मामले की जांच में जुटी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह सामूहिक आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और कारण छिपा है। इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्थिक बदहाली, अकेलापन और सामाजिक सुरक्षा की कमी किस तरह एक पूरे परिवार को खत्म कर सकती है।






















