बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के नवलपुर मिश्रौलिया में एक ही परिवार के चार लोगों द्वारा आत्महत्या (Muzaffarpur Suicide Case) किए जाने की दर्दनाक घटना ने प्रशासन को गहरी चिंता में डाल दिया है। इस सामूहिक आत्महत्या कांड को केवल एक आपराधिक घटना मानने के बजाय इसके पीछे की सामाजिक और आर्थिक वजहों की गहन पड़ताल शुरू कर दी गई है। पुलिस जांच के बाद अब आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू की सक्रियता ने संकेत दे दिया है कि मामला साधारण नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक शोषण से जुड़ा हो सकता है।
घटना के सामने आने के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस ने निजी फाइनेंस कंपनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। शहर और ग्रामीण इलाकों में संचालित कई निजी फाइनेंस कंपनियों के दफ्तरों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई का नेतृत्व सिटी एसपी कोटा कुमार किरण और डीसीपी ईस्ट टू मनोज कुमार सिंह ने किया, जबकि सकरा थाना की पुलिस भी इस अभियान में शामिल रही।
छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने फाइनेंस कंपनियों के कामकाज को बारीकी से परखा। लोन देने की प्रक्रिया, ब्याज दरों की पारदर्शिता, वसूली के तौर-तरीके और कर्जदारों पर बनाए जा रहे कथित दबाव को लेकर गहन जांच की गई। पुलिस अधिकारियों ने कर्मचारियों से पूछताछ की और कई अहम दस्तावेजों को खंगाला, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं नियमों की आड़ में अवैध वसूली या मानसिक उत्पीड़न तो नहीं किया जा रहा था।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में सामने आए आत्महत्या के मामलों में यह आशंका जताई जा रही है कि निजी फाइनेंस कंपनियों की ओर से लगातार दबाव और कथित मानसिक प्रताड़ना ने पीड़ित परिवार को इस हद तक तोड़ दिया कि उन्होंने यह खौफनाक कदम उठा लिया। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ाया है।
सिटी एसपी कोटा कुमार किरण ने साफ शब्दों में कहा है कि जांच निष्पक्ष और गहन होगी। यदि किसी भी फाइनेंस कंपनी की भूमिका नियमों के उल्लंघन, अवैध वसूली या कर्जदारों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने में सामने आती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आम लोगों को आर्थिक शोषण से बचाना प्रशासन की प्राथमिकता है और आत्महत्या जैसे मामलों की जड़ तक पहुंचकर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस बीच ईओयू की टीम भी मामले की जांच के लिए मौके पर पहुंची, हालांकि टीम मीडिया से कोई बातचीत किए बिना लौट गई। ईओयू की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन यह भी माना जा रहा है कि आर्थिक लेन-देन और फाइनेंस कंपनियों की भूमिका को लेकर समानांतर जांच चल रही है।






















