पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नागमणि (Nagmanni Statement) एक बार फिर अपने बयानों को लेकर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गए हैं। इस बार उनका निशाना केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और जदयू विधायक चेतन आनंद रहे, जिन पर उन्होंने न सिर्फ व्यक्तिगत तौर पर बल्कि व्यापक सामाजिक सोच को लेकर भी सवाल खड़े किए। यूजीसी के नए नियमों का समर्थन करते हुए और इसका विरोध करने वालों को नागमणि ने दो टूक शब्दों में कहा कि चाहे गिरिराज सिंह हों या चेतन आनंद, सभी को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है।
उनका कहना था कि अगर समाज और राजनीति में सोच नहीं बदली गई तो इसके गंभीर और दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यह कीमत बहुत महंगी साबित हो सकती है, जिसे आने वाले समय में हर किसी को चुकाना पड़ सकता है।
अपने बयान में नागमणि ने सवर्ण समाज का सीधे तौर पर उल्लेख करते हुए एक संवेदनशील सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि क्या पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और महादलित समाज के लोगों के साथ अन्याय को स्वीकार कर लिया जाना चाहिए। उन्होंने तीखे शब्दों में पूछा कि क्या इन वर्गों के लोगों की गर्दन काट दी जाएगी, जो यह दर्शाता है कि समाज के कमजोर तबकों के प्रति भेदभाव की सोच आज भी कहीं न कहीं जीवित है।
आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए नागमणि ने कहा कि उनकी सरकार के समय लाया गया बिल पूरी तरह सही था। हालांकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उस पर लगाए गए रोक के फैसले का सम्मान करने की बात भी कही। नागमणि ने साफ किया कि अदालत के आदेश के आगे किसी की नहीं चलती, लेकिन समाज की सोच और मानसिकता बदलना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
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उन्होंने 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण का उदाहरण देते हुए एक बड़ा सवाल खड़ा किया। नागमणि ने कहा कि जब ऊंची जातियों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया गया, तब क्या किसी दलित, महादलित या पिछड़े वर्ग के लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध किया या पुतला दहन किया। उनके मुताबिक यह इस बात का प्रमाण है कि वंचित वर्गों ने हमेशा संयम और संवैधानिक मर्यादा का पालन किया है।
इसी बयान में नागमणि ने अजीत पवार के कथित प्लेन क्रैश से जुड़े बयान और उस पर ममता बनर्जी द्वारा जांच की मांग को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में राजनीति की जा रही है और इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है। नागमणि का कहना था कि कोई भी पायलट जानबूझकर अपनी या दूसरों की जान खतरे में नहीं डालेगा। ऐसे आरोप न सिर्फ गलत हैं बल्कि पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना भी हैं।






















