नालंदा जिले में अवैध हथियारों की सप्लाई (Nalanda Arms Smuggling) चेन पर पुलिस ने बड़ी चोट की है। बिहारशरीफ के सोहन कुआं मोहल्ले में एसटीएफ और लहेरी थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पांच हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। इस छापेमारी में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने साफ कर दिया है कि शहर के भीतर किराए के फ्लैट हथियार तस्करी के सुरक्षित ठिकानों में बदलते जा रहे हैं। पुलिस ने मौके से पांच पिस्टल, एके-47 के 153 जिंदा कारतूस, 315 बोर का एक कारतूस, 11 मैगजीन, 24 हजार रुपये नकद और एक स्कॉर्पियो वाहन जब्त किया है।

गुरुवार दोपहर करीब 3:30 बजे आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नालंदा के एसपी भारत सोनी ने बताया कि एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि सोहन कुआं इलाके में स्थित एक किराए के फ्लैट में हथियारों की अवैध डिलीवरी होने वाली है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रणनीति बनाई और अचानक छापेमारी की। पुलिस के पहुंचते ही फ्लैट में मौजूद तस्करों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन घेराबंदी कर सभी पांचों को दबोच लिया गया।
जांच के दौरान सामने आया कि बरामद की गई पिस्टलों पर ‘मेड इन चाइना’ लिखा हुआ है, जो अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियार सप्लाई नेटवर्क की आशंका को और मजबूत करता है। एके-47 के कारतूस मिलने के बाद मामले की जानकारी संबंधित जांच एजेंसियों को दे दी गई है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि ये कारतूस किन रास्तों से बिहार तक पहुंचे और इनका अंतिम उपयोग कहां होना था।
पटना से पंजाब तक फैला था ‘अंकल जी’ का नेटवर्क, NIA की गिरफ्त में आते ही टूटी हथियार तस्करी की रीढ़
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार थाना क्षेत्र के गौरा गढ़ मोहल्ला निवासी मोहम्मद परवेज, मुंगेर निवासी सौरभ झा और झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के तीन युवकों के रूप में हुई है। झारखंड के तीनों आरोपी आपस में सगे भाई बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार जिस फ्लैट से हथियार बरामद हुए हैं, उसे सौरभ झा ने किराए पर लिया था और यही फ्लैट हथियारों की खरीद-बिक्री और डिलीवरी का केंद्र बना हुआ था। सौरभ स्थानीय तस्करों और झारखंड से आए सप्लायरों के बीच संपर्क की अहम कड़ी था।
पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर यह भी सामने आया है कि मोहम्मद परवेज पहले भी हथियार तस्करी के मामले में जेल जा चुका है। स्कॉर्पियो वाहन झारखंड से आए तस्करों का बताया जा रहा है, जिससे यह साफ होता है कि यह नेटवर्क बिहार-झारखंड सीमा के पार फैला हुआ था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की परतें खोलने, सप्लाई रूट और संभावित खरीदारों की पहचान करने में जुटी है। इस कार्रवाई को नालंदा पुलिस की अब तक की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, जिसने जिले में सक्रिय अवैध हथियार कारोबारियों में खलबली मचा दी है।






















