Viksit Bharat Ji Ram Ji Bill: पटना में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की साझा प्रेसवार्ता में मंच पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, हम, लोजपा (रामविलास) और रालोपा के प्रदेश अध्यक्षों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि ‘विकसित भारत जी राम जी’ बिल को लेकर एनडीए पूरी तरह आक्रामक रणनीति में है। प्रेसवार्ता के दौरान जहां सरकार की नीतियों को ग्रामीण विकास से जोड़ा गया, वहीं विपक्ष पर राम के नाम से राजनीति करने और विकास विरोधी रवैये का आरोप भी लगाया गया।
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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने अपने बयान में कहा कि मनरेगा एक समय भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका था। मजदूरों को न समय पर काम मिलता था और न ही समय पर मजदूरी। उन्होंने दावा किया कि नए ‘विकसित भारत जी राम जी’ बिल में इन सभी खामियों को दूर किया गया है और भ्रष्टाचार पर निर्णायक प्रहार किया गया है। सरावगी ने यह भी कहा कि जैसे ही ‘विकसित भारत’ और ‘जी राम जी’ शब्द का जिक्र होता है, विपक्ष को तकलीफ होने लगती है। उनके अनुसार विपक्ष को बिल की नीयत और काम से नहीं बल्कि उसके नाम में ‘राम’ होने से परेशानी है।

संजय सरावगी ने केंद्र सरकार के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि विकसित बिहार के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले गांवों को सशक्त करना जरूरी है। इसी सोच के तहत नए बिल में गांवों के संसाधन बढ़ाने, रोजगार के अवसर विस्तार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि अब 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है और अगर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया तो मजदूरों को भत्ता मिलेगा। इसके साथ ही मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता लाते हुए साप्ताहिक भुगतान की गारंटी दी गई है, जिससे महीनों तक मजदूरों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा। गांवों में स्कूल, सड़क, अनाज भंडारण और अन्य आवश्यक ढांचागत कार्यों को भी इस बिल से गति मिलेगी।
लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने प्रेसवार्ता में कहा कि पहले हर योजना में भ्रष्टाचार आम बात थी। उन्होंने कांग्रेस के एक पूर्व प्रधानमंत्री के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि एक रुपये में से मजदूर तक सिर्फ 10 पैसे पहुंचने की बात स्वयं कांग्रेस ने स्वीकार की थी। राजू तिवारी ने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और योजनाओं की राशि सीधे लाभुकों के खाते में जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष राम के नाम पर राजनीति कर रहा है, जबकि महात्मा गांधी ने भी अपने अंतिम क्षणों में ‘हे राम’ कहा था। उनके अनुसार अगर विपक्ष के बस में होता तो शायद उस पर भी पाबंदी लगा दी जाती। उन्होंने भावनात्मक अंदाज में कहा कि इस बिल के नाम में राम का होना यह साबित करता है कि यह देश की सांस्कृतिक आत्मा और विकास की सोच दोनों से जुड़ा है।

जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विपक्ष पर ‘जी राम जी’ बिल को लेकर दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा में जहां पहले 100 दिन की रोजगार गारंटी थी, अब नए कानून में इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इसके साथ ही खर्च की सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, जिससे मजदूरों और ग्रामीण परियोजनाओं को अधिक संसाधन मिल सकेंगे।

उमेश कुशवाहा ने कहा कि पहले मजदूरों को महीनों तक भुगतान का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब साप्ताहिक भुगतान की कानूनी गारंटी दी गई है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी भी गांवों को मजबूत बनाने की बात करते थे और राम राज्य की कल्पना करते थे। उनके अनुसार ‘जी राम जी’ की शुरुआत उसी विचारधारा को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ाने का प्रयास है।






















