बिहार में नीट छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत (NEET Student Death) का मामला अब राजनीतिक रूप से गरमाता जा रहा है। पुलिस की प्रेसवार्ता को लेकर उठे सवालों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में सच्चाई को दबाने और लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है, जिससे आम जनता में सरकार की मंशा को लेकर संदेह गहराता जा रहा है। इस बयान के बाद यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया बल्कि राजनीतिक बहस और सत्ता-विपक्ष के टकराव का केंद्र बन गया है।
राबड़ी देवी ने अपने बयान में आशंका जताई कि इस केस के तार सत्ता पक्ष के किसी प्रभावशाली मंत्री या उनके परिवार से जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जांच को अचानक सीबीआई को सौंपना कई सवाल खड़े करता है और यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि स्थानीय स्तर पर सबूतों को प्रभावित करने या बड़े चेहरों को बचाने की कोशिश हो सकती है। उनका कहना है कि अगर राज्य की जांच एजेंसियां सक्षम हैं तो सरकार को उन पर भरोसा करना चाहिए था, लेकिन जल्दबाजी में फैसला लेने से संदेह और गहरा हो गया है।
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इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की प्रेसवार्ता को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। राबड़ी देवी का आरोप है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल खानापूर्ति के लिए की गई और उसमें कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं दिए गए। उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि आखिर छात्रा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और जांच की दिशा क्या है। उनका दावा है कि पारदर्शिता की कमी से लोगों के मन में यह धारणा बन रही है कि कहीं न कहीं सच छिपाने की कोशिश हो रही है।
राबड़ी देवी ने छात्रा की मौत के साथ-साथ राज्य के हालिया बजट पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बजट को दिशाहीन बताते हुए कहा कि इसमें युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए ठोस योजना का अभाव है। उनके अनुसार सरकार ने विशेष राज्य के दर्जे की मांग जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज कर केवल आंकड़ों का खेल पेश किया है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह का बजट राज्य के विकास के लिए प्रभावी साबित नहीं होगा और आम जनता को ठोस राहत देने में असफल रहेगा।






















