NEET छात्रा कांड: राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा NEET छात्रा कांड अब केवल एक रहस्यमयी मौत का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की कानून-व्यवस्था और जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता हुआ राष्ट्रीय स्तर का संवेदनशील केस बन चुका है। लगभग 22 दिन बीत जाने के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ था। इस पुष्टि के बाद जांच की दिशा निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है और अब पूरे मामले का केंद्र बिंदु डीएनए टेस्ट बन गया है।
6 जनवरी को जब छात्रा हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली थी, तभी से परिवार इस घटना को सामान्य नहीं मान रहा था। शुरुआत में इलाज और रेफर की प्रक्रिया चलती रही, लेकिन 11 जनवरी को उसकी मौत ने कई संदेहों को जन्म दे दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निजी अंगों पर चोट के निशान मिलने के बाद मामला पूरी तरह आपराधिक कांड में बदल गया। इसके बावजूद परिजनों का आरोप है कि शुरुआती जांच में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया और केस को अलग दिशा में मोड़ने की कोशिश की गई।
एफएसएल रिपोर्ट सामने आने के बाद एसआईटी ने तेजी दिखाते हुए डीएनए साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। 25 जनवरी की रात जहानाबाद जाकर छात्रा के माता-पिता, भाई और दो मामा का ब्लड सैंपल लिया गया। इसके बाद पटना के गर्दनीबाग अस्पताल में छह अन्य संदिग्धों का सैंपल भी कलेक्ट किया गया। इस तरह अब तक कुल 11 लोगों के डीएनए नमूने जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। पुलिस को उम्मीद है कि डीएनए रिपोर्ट से यह साफ हो सकेगा कि घटना के समय छात्रा के संपर्क में कौन-कौन लोग थे।
जांच के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। छात्रा के पिता ने डीजीपी को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। सांसद पप्पू यादव ने सीबीआई जांच की अपील की है, जबकि वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी प्रधानमंत्री को पत्र लिख चुके हैं। जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी परिजनों से मुलाकात कर चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य सरकार को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
मामले में लापरवाही के आरोपों के बाद एसआई रोशनी कुमारी और दारोगा हेमंत झा को निलंबित किया गया है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने पुलिस अधिकारियों को खुली छूट देते हुए निष्पक्ष और तेज जांच के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद परिवार का भरोसा अब भी पूरी तरह बहाल नहीं हो सका है। उनका कहना है कि सवाल वही बार-बार पूछे जा रहे हैं और असली दोषियों तक पहुंचने में देरी हो रही है।
इस केस में सबसे गंभीर पहलू यह है कि छात्रा नाबालिग थी। उसके जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार उसकी जन्मतिथि 3 सितंबर 2008 दर्ज है, यानी घटना के समय उसकी उम्र 18 साल से कम थी। ऐसे में पुलिस अब पॉक्सो एक्ट लगाने की तैयारी कर रही है, जिससे आरोपियों पर और सख्त धाराएं जुड़ेंगी।






















