NEET student case Bihar: बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दूसरे दिन राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया जब NEET छात्रा कांड को लेकर बिहार विधान परिषद के पोर्टिको के बाहर विपक्षी दलों ने जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। न्याय की मांग और जांच प्रक्रिया पर सवालों के बीच सदन के बाहर नारेबाजी और हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर विपक्षी विधान पार्षदों का आक्रोश साफ दिखाई दिया। इस बीच नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी बिना कोई बयान दिए सीधे परिषद भवन के भीतर चली गईं।
विधान परिषद के बाहर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी सदस्यों का कहना है कि NEET छात्रा के साथ हुई घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। उनका आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रही और केवल औपचारिक कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है। विपक्ष ने स्पष्ट मांग रखी कि इस मामले की जांच केवल सीबीआई को सौंपने से काम नहीं चलेगा, बल्कि किसी सिटिंग जज की निगरानी में जांच होनी चाहिए ताकि पीड़ित छात्रा और उसके परिवार को निष्पक्ष न्याय मिल सके।
बजट सत्र के दूसरे दिन का महत्व इस कारण भी बढ़ गया क्योंकि आज राज्य का बजट पेश किया जाना है। विपक्ष ने सरकार से सीधा सवाल किया कि जिस तरह केंद्र सरकार के बजट में बिहार को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, उसी तरह राज्य सरकार का बजट भी आम जनता के लिए निराशाजनक साबित होगा। NEET छात्रा कांड को लेकर हो रहे हंगामे को विपक्ष ने सरकार की कानून-व्यवस्था पर विफलता से जोड़ते हुए बजट चर्चा से पहले ही सियासी दबाव बना दिया।
विधान परिषद के पोर्टिको में लगाए गए नारों में महिलाओं की सुरक्षा, पुलिस प्रशासन की भूमिका और डीजीपी से जवाबदेही की मांग प्रमुख रूप से गूंजती रही। विपक्षी नेता लगातार यह कहते नजर आए कि छात्रा के परिवार को जवाब मिलना चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान “इंकलाब जिंदाबाद” और “छात्रा को न्याय दो” जैसे नारे माहौल को और तीखा बनाते रहे।
इस पूरे घटनाक्रम में राबड़ी देवी की चुप्पी भी चर्चा का विषय बन गई। विपक्षी खेमे की नेता होने के बावजूद उनका बिना कुछ बोले सदन के अंदर जाना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है। एक ओर बाहर विपक्षी विधायक और विधान पार्षद सरकार पर हमला बोल रहे थे, वहीं दूसरी ओर परिषद के भीतर कार्यवाही की तैयारी चल रही थी। इससे साफ है कि NEET छात्रा कांड अब केवल एक कानूनी मामला नहीं रह गया, बल्कि बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुका है।






















