पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत (NEET Student Death) अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है। इस पूरे प्रकरण में जन सुराज पार्टी ने पीड़ित परिवार को मुफ्त कानूनी सहायता देने का ऐलान कर बहस के केंद्र में खुद को ला खड़ा किया है। पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इसे सिस्टम की असफलता बताते हुए दावा किया है कि जन सुराज के लगातार दबाव के कारण ही सरकार को विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन करना पड़ा और जांच में लापरवाही बरतने वाले दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया।
रविवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत किशोर ने इस मामले को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा की रहस्यमयी मौत के बाद भी किसी बड़े राजनीतिक चेहरे का पीड़ित परिवार के साथ खड़ा न होना लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। उनके अनुसार, यह घटना केवल एक लड़की की मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम की तस्वीर है जो कमजोर लोगों की आवाज सुनने में नाकाम रहता है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि जब यह मामला सामने आया, तब न तो सत्ता पक्ष के नेता जमीन पर उतरे और न ही विपक्ष ने कोई ठोस पहल की। ऐसे हालात में जन सुराज ने सड़क और समाज के बीच खड़े होकर पीड़ित परिवार की आवाज को उठाया। उन्होंने लोकतंत्र में भूमिकाओं की व्याख्या करते हुए कहा कि जनता ने NDA को सत्ता में रहने, RJD और INDIA गठबंधन को विपक्ष में बैठने और जन सुराज को समाज के बीच रहने की जिम्मेदारी दी है। उनका कहना था कि जब सत्ता और विपक्ष दोनों खामोश रहे, तब जन सुराज ने हस्तक्षेप किया।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के सवाल पर PK ने साफ किया कि अब यह लड़ाई सिर्फ भावनात्मक समर्थन तक सीमित नहीं रहेगी। जन सुराज पार्टी इस केस की पूरी कानूनी लड़ाई मुफ्त में लड़ेगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता और अनुभवी वकील वाई. वी. गिरी इस मामले में परिवार की ओर से पैरवी करेंगे। प्रशांत किशोर ने कहा कि न्याय की राह में पैसों की कमी कभी बाधा नहीं बननी चाहिए और इसी सोच के तहत जन सुराज ने यह जिम्मेदारी उठाई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी अदालत के साथ-साथ सरकार और प्रशासन पर भी लगातार दबाव बनाए रखेगी ताकि किसी भी दोषी को बचने का मौका न मिले।
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SIT के गठन और अधिकारियों के निलंबन को लेकर प्रशांत किशोर ने सीधे तौर पर इसका श्रेय जन सुराज के दबाव को दिया। उन्होंने बताया कि जिस दिन वे खुद जहानाबाद जाकर पीड़ित छात्रा के परिजनों से मिले, उसी दिन सरकार को SIT के गठन की घोषणा करनी पड़ी। इसके बाद जन सुराज के प्रतिनिधियों ने SSP से मिलकर जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग रखी। PK के मुताबिक, उसी दबाव का नतीजा है कि दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण है कि जब समाज संगठित होकर सवाल पूछता है, तो सत्ता को झुकना पड़ता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि गंभीर मामलों में सत्ता कुर्सी बचाने में और विपक्ष केवल बयानबाजी में उलझा रहता है। उनका कहना था कि अगर जन सुराज जैसे लोग सड़क पर उतरकर दबाव न बनाते, तो संभव है कि यह मामला भी बाकी कई मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाता।

आगे की रणनीति को लेकर PK ने संकेत दिया कि SIT की रिपोर्ट आने के बाद जन सुराज अपना अगला कदम तय करेगा। अगर जांच रिपोर्ट में किसी तरह की लीपापोती या सच्चाई छिपाने की कोशिश हुई, तो पार्टी इसे सड़क से लेकर अदालत तक चुनौती देगी। उनके मुताबिक, NEET छात्रा को न्याय दिलाने की यह लड़ाई सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि बिहार में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की असली परीक्षा है।
इस बीच, जन सुराज के संगठनात्मक और राजनीतिक एजेंडे को लेकर भी प्रशांत किशोर ने बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को दिए गए छह महीने का समय पूरा होने के बाद 1 जून से जन सुराज गांव-गांव और वार्ड-वार्ड जाकर सरकार के वादों की हकीकत जनता के सामने रखेगा। बेरोजगारी, पलायन, पेंशन और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बड़े जनआंदोलन की तैयारी की जा रही है।






















