भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin Patna Visit) का एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार पटना पहुंचना बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है. सोमवार देर शाम राजधानी पहुंचे नितिन नबीन के तीन दिवसीय दौरे को महज औपचारिक यात्रा मानने को सियासी गलियारे तैयार नहीं हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस दौरान वे संगठनात्मक समीक्षाओं के साथ-साथ बिहार की वर्तमान और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर वरिष्ठ नेताओं से गहन विचार-विमर्श करेंगे. यही वजह है कि उनके अचानक और बार-बार पटना आने को बड़े सियासी प्रयोग से जोड़कर देखा जा रहा है.
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इस दौरे की टाइमिंग इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि खरमास के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज हैं. ऐसे में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि पार्टी बिहार में केवल सहयोगी की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सत्ता संतुलन और नेतृत्व को लेकर नए विकल्पों पर गंभीरता से मंथन हो रहा है. नितिन नबीन की मौजूदगी को इसी रणनीतिक कवायद का हिस्सा माना जा रहा है.
राजनीतिक तापमान तब और बढ़ गया जब राष्ट्रीय जनता दल ने खुले तौर पर दावा किया कि बीजेपी अब नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की तैयारी में है. राजद प्रवक्ता एजाज अहमद के बयान ने इस बहस को और धार दी कि बीजेपी नेतृत्व नीतीश कुमार की मौजूदा कार्यशैली और सार्वजनिक आचरण को लेकर असहज है. उनके मुताबिक बीजेपी जेडीयू के भीतर मौजूद अपने समर्थक नेताओं के जरिए भविष्य की राजनीति को आकार देना चाहती है और संभावित नए चेहरे पर भी विचार हो रहा है.
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इन अटकलों के बीच अप्रैल में होने वाले राज्यसभा चुनाव भी सियासी गणित को जटिल बना रहे हैं. बिहार की पांच राज्यसभा सीटों में से एक राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की सीट है. संकेत मिल रहे हैं कि बीजेपी इस बार कुशवाहा को राज्यसभा भेजने के पक्ष में नहीं है. यदि ऐसा होता है तो रालोमो के भीतर टूट की स्थिति बन सकती है, क्योंकि पार्टी के अधिकांश विधायक पहले ही बीजेपी के संपर्क में बताए जा रहे हैं. यह स्थिति बिहार के एनडीए समीकरण को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है.
हालांकि बीजेपी ने नितिन नबीन के दौरे को पारिवारिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों से जोड़कर पेश किया है. पार्टी के अनुसार वे 31 दिसंबर को पटना में अपने पिता और पूर्व विधायक नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे. लेकिन राजनीति में संयोगों पर कम और संकेतों पर ज्यादा भरोसा किया जाता है. ऐसे में नितिन नबीन की लगातार मौजूदगी, कैबिनेट विस्तार की आहट और राज्यसभा चुनाव की आंतरिक राजनीति यह साफ कर रही है कि बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है.






















