भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। बिहार के कद्दावर नेता और मंत्री नितिन नवीन (Nitin Naveen) के भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के साथ ही राज्यभर में उत्सव का माहौल बन गया। पटना से लेकर नवादा तक और शहरों से गांवों तक कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों, पटाखों और मिठाइयों के साथ अपनी खुशी जाहिर की। पार्टी कार्यालयों और प्रमुख चौराहों पर उमड़ा उत्साह यह संकेत दे रहा था कि यह फैसला केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि संगठन की भविष्य की दिशा तय करने वाला क्षण है।
भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नितिन नवीन के नेतृत्व को संगठन के लिए निर्णायक बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक समझ, जमीनी पकड़ और युवा ऊर्जा पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती देगी। 45 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर नितिन नवीन भाजपा के सबसे युवा अध्यक्षों में शामिल हो गए हैं, जिसे पार्टी के भीतर पीढ़ीगत बदलाव और नेतृत्व के नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। आज दिल्ली में उनके औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करने के साथ ही यह संदेश भी गया है कि भाजपा आने वाले समय में युवा नेतृत्व पर बड़ा दांव खेलने को तैयार है।
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बिहार में इस फैसले को गौरव के क्षण के रूप में देखा जा रहा है। वरिष्ठ नेताओं ने इसे राज्य के लिए सम्मान बताते हुए कहा कि नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना बिहार की राजनीतिक स्वीकार्यता और संगठनात्मक योगदान को रेखांकित करता है। कार्यकर्ताओं के बीच यह विश्वास भी मजबूत हुआ कि उनके नेतृत्व में पार्टी का संगठनात्मक ढांचा और अधिक मजबूत होगा तथा जमीनी स्तर पर भाजपा की पकड़ और सशक्त बनेगी।
सबसे अधिक उत्साह नितिन नवीन के पैतृक गांव अमावां में देखने को मिल रहा है, जहां सुबह से ही जश्न की तैयारियां शुरू हो गई हैं। नवादा जिले के रजौली प्रखंड स्थित इस गांव में विधायक अनिल सिंह की देखरेख में भव्य आयोजन की योजना बनाई गई है। गांव में 251 किलो लड्डू तैयार कराए गए हैं, गुलाल की होली खेली जाएगी और पूरे इलाके को उत्सव के रंग में रंगने की तैयारी है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि अपने गांव और जिले के इतिहास का यादगार दिन है।

अमावां वही गांव है, जहां से नितिन नवीन ने ‘गांव चलो’ अभियान की शुरुआत कर संगठन को जमीनी स्तर पर जोड़ने का संदेश दिया था। आज उसी गांव से उठती खुशियों की गूंज यह बताती है कि उनका राजनीतिक सफर केवल दिल्ली की सत्ता तक सीमित नहीं, बल्कि गांव-गांव तक जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोग इसे बिहार के सम्मान और भविष्य की राजनीति के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं।






















