बिहार अब खेती और श्रम आधारित अर्थव्यवस्था की छवि से आगे निकलकर हाई-टेक इंडस्ट्री की ओर कदम बढ़ा रहा है. राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर सेक्टर को बिहार के औद्योगिक भविष्य का नया इंजन बनाने की तैयारी कर ली है. इसी कड़ी में बिहार सेमीकंडक्टर नीति को मंजूरी दी गई है
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यह नीति मुख्यमंत्री के ‘सात निश्चय-3: समृद्ध उद्योग, सशक्त बिहार’ विजन का अहम हिस्सा है. सरकार को उम्मीद है कि इस नीति के लागू होने से राज्य में करीब 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश आएगा. इसके साथ ही 2 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे.राज्य सरकार की योजना है कि कम-से-कम 5000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली तीन प्रमुख सेमीकंडक्टर इकाइयों को बिहार में स्थापित किया जाए. इनमें फैब यानी चिप निर्माण इकाइयां और एटीएमपी यूनिट शामिल होंगी, जहां चिप्स का असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग की जाएगी.
बिहार कैबिनेट ने ग्लोबल कंपनियों को राज्य में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने की भी मंजूरी दी है. खास बात यह है कि अगर कंपनियां बिहार के मूल निवासियों को प्राथमिकता से रोजगार देती हैं, तो उन्हें तय सब्सिडी से अधिक अनुदान मिलेगा.






















