मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) एक बार फिर अपने कार्यशैली और विज़न को लेकर सुर्खियों में हैं। मंगलवार को वे अचानक राजधानी पटना स्थित डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी पहुंचे और अपने ड्रीम प्रोजेक्ट का बारीकी से निरीक्षण किया। करीब 21 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही इस अत्याधुनिक साइंस सिटी को मुख्यमंत्री ने न केवल देखा, बल्कि वहां मौजूद व्यवस्थाओं, सुविधाओं और शैक्षणिक उद्देश्यों की भी विस्तार से जानकारी ली। नीतीश कुमार का यह दौरा इस बात का संकेत है कि राज्य में विज्ञान आधारित शिक्षा और नवाचार को लेकर सरकार किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दिए। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि साइंस सिटी में जो भी अतिरिक्त सुविधाएं प्रस्तावित हैं, उन्हें तय समय-सीमा में हर हाल में पूरा किया जाए। नीतीश कुमार ने इस बात पर खास जोर दिया कि यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के वैज्ञानिक सोच को आकार देने वाला केंद्र है। उनका मानना है कि यदि बच्चों और छात्राओं को कम उम्र से ही विज्ञान की मूलभूत समझ व्यावहारिक तरीके से दी जाए, तो इससे बेहतर निवेश भविष्य के लिए और कुछ नहीं हो सकता।
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मुख्यमंत्री ने साइंस सिटी परिसर में मौजूद बच्चों से मुलाकात की और उनसे बातचीत भी की। बच्चों की जिज्ञासा, सवाल और उत्साह देखकर नीतीश कुमार ने कहा कि यही ऊर्जा बिहार को ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यहां आने वाले छात्र-छात्राओं को केवल किताबों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रयोग, मॉडल और आधुनिक तकनीक के माध्यम से विज्ञान को रोचक और सरल बनाया जाए।
नीतीश कुमार ने यह भी साफ किया कि साइंस सिटी में सभी सुविधाएं पूरी तरह कार्यात्मक और समय से पहले तैयार होनी चाहिए। उनका कहना था कि यह परियोजना बिहार की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगी। डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर बनी यह साइंस सिटी राज्य के युवाओं को वैज्ञानिक सोच, नवाचार और तकनीकी कौशल की दिशा में प्रेरित करेगी।






















