पूर्णिया में आज जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वक्फ़ बोर्ड के मुद्दे पर कहा कि उनकी पार्टी ऐसे किसी भी कानून के खिलाफ है जो समाज के एक बड़े वर्ग को तोड़ने का काम करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस कानून को पास करवाना चाहती है लेकिन इसका सबसे ज्यादा नुकसान जदयू को होगा। उन्होंने कहा कि जदयू के 12 सांसद वक्त बोर्ड का विरोध करेंगे तो यह कानून सदन में पास नहीं होगा और अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान नीतीश कुमार और जनता दल यूनाइटेड को चुनाव में उठाना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि जिस तरह से कांग्रेसियों ने बिहार को लालू यादव के हाथों बेच दिया। उसी तरह भाजपायों ने नीतीश कुमार के हाथों बिहार का सौदा कर लिया है। उन्हें यह भी पता नहीं चलता कि नीतीश कुमार का स्वास्थ्य इन दिनों कैसा चल रहा है। जब एक छोटी सी बहाली में स्वास्थ्य की कई जांच प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है तो 12 करोड़ राज्य को चलाने वाले मुखिया के स्वास्थ्य की जांच तो होनी ही चाहिए। प्रशांत किशोर ने दावा किया नीतीश कुमार को कुछ भी याद नहीं रहता। उन्हें अपने मंत्री के नाम और जिला का नाम भी अब याद नहीं रहता है।
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प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार के स्वास्थ्य पर टिप्पणी करने वाले पहले व्यक्ति उनके सहयोगी सुशील कुमार मोदी थे। तब से बिहार के कई मंत्रियों ने उनके स्वास्थ्य पर टिप्पणी की है। मैंने जनवरी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन BPSC विरोध प्रदर्शन के दौरान, मुझे पता चला कि नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि उन्हें पता ही नहीं है कि राज्य में क्या चल रहा है।