मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बहुचर्चित समृद्धि यात्रा (Nitish Kumar Samriddhi Yatra) के तहत 16 जनवरी को बेतिया आगमन को लेकर प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। यह दौरा केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन सैकड़ों विकास योजनाओं की वास्तविक प्रगति का मूल्यांकन माना जा रहा है, जिनका शिलान्यास मुख्यमंत्री ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान किया था। कुल 717.12 करोड़ रुपये की लागत से घोषित और शिलान्यास की गई योजनाओं पर अब सीधा सवाल यही है कि वे कागजों से निकलकर जमीन पर कितनी उतरीं।
सरकारी स्तर पर संकेत साफ हैं कि मुख्यमंत्री इस बार केवल फाइलों तक सीमित रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होंगे। वे विभागीय प्रस्तुतियों के साथ-साथ योजनाओं की जमीनी सच्चाई जानना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से संबंधित विभागों ने विस्तृत पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन तैयार किया है, जिसमें प्रोजेक्ट की स्थिति, खर्च, प्रगति प्रतिशत और अड़चनों को शामिल किया गया है। यह समीक्षा प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी भी मानी जा रही है।
गौरतलब है कि 23 दिसंबर 2024 को प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने मझौलिया प्रखंड के धोकराहां पंचायत अंतर्गत शिकारपुर गांव से 545.24 करोड़ रुपये की 300 योजनाओं का शिलान्यास किया था। इसके अलावा बगहा-दो प्रखंड के घोटवा टोला से 171.88 करोड़ रुपये की 39 योजनाओं की आधारशिला रखी गई थी। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि कई योजनाएं अब तक प्रारंभिक चरण में भी नहीं पहुंच सकी हैं, जिससे समृद्धि यात्रा के दौरान समीक्षा और भी अहम हो जाती है।
इन योजनाओं में बेतिया और आसपास के क्षेत्रों की आधारभूत संरचना को मजबूती देने वाले बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। जल संसाधन विभाग की ओर से मसान नदी के दाएं तटबंध और सिकरहना दायां तटबंध निर्माण जैसी योजनाएं बाढ़ नियंत्रण और कृषि सुरक्षा से जुड़ी हैं, जबकि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का आवासीय विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश माना जा रहा है। ग्रामीण सड़कों, हाई लेवल ब्रिज, स्टेडियम के पुनर्निर्माण और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी घोषणाएं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रोजगार की संभावनाओं को सीधे प्रभावित करती हैं।






















