Nitish Kumar Samriddhi Yatra: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी बहुप्रतीक्षित समृद्धि यात्रा की शुरुआत पश्चिम चंपारण के बेतिया से कर एक बार फिर यह साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में उनकी राजनीति का केंद्र विकास, रोजगार और सामाजिक संतुलन रहने वाला है। बापू की कर्मभूमि चंपारण से निकली यह यात्रा सिर्फ एक सरकारी दौरा नहीं, बल्कि 2025 के बाद की बिहार राजनीति की दिशा तय करने वाला बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश भी मानी जा रही है।
बेतिया पहुंचते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जोरदार स्वागत हुआ। कुमारबाग औद्योगिक क्षेत्र से लेकर रमना मैदान तक विकास का रोडमैप उनके भाषण और घोषणाओं में साफ झलकता रहा। नीतीश कुमार ने मंच से कहा कि बिहार के लिए जो काम उनकी सरकार ने किया है, वैसा पिछली सरकारें सोच भी नहीं सकती थीं। यह बयान सीधे तौर पर उनके विरोधियों के लिए सख्त राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
समृद्धि यात्रा के पहले ही दिन पश्चिम चंपारण को 153 करोड़ रुपये की लागत से 125 योजनाओं का शिलान्यास और 29 करोड़ रुपये की 36 योजनाओं का उद्घाटन मिला। इसमें सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कृषि और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। नीतीश कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि अब बिहार को पीछे देखने की जरूरत नहीं है, बल्कि सबको यह बताना चाहिए कि राज्य विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास पर विशेष जोर दिया। कुमारबाग में औद्योगिक क्षेत्र को और मजबूत करने, बंद पड़ी चनपटिया चीनी मिल को दोबारा चालू करने और डेयरी सेक्टर को विस्तार देने की घोषणा की गई। 434 गांवों में दुग्ध उत्पादन समितियों के गठन और सुधा के नए बूथ खोलने की योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। बेतिया शहर अस्पताल को अति विशिष्ट अस्पताल में बदलने और खेलों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का ऐलान भी इस यात्रा का बड़ा आकर्षण रहा।
नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर बोलते हुए सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए नई नीति लाने की बात कही। उनका कहना था कि इससे सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता सुधरेगी और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। यह घोषणा स्वास्थ्य क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही बहस को नए सिरे से हवा देती है।
शिक्षा और रोजगार को लेकर मुख्यमंत्री का रुख पहले की तरह आक्रामक दिखा। उन्होंने याद दिलाया कि उनकी सरकार ने 2 लाख 58 हजार सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति की और नियोजित शिक्षकों को स्थायी करने के लिए कई मौके दिए। महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत दो लाख रुपये से भी अधिक की सहायता दी जाएगी और पंचायती राज में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देकर बिहार ने देश को नई दिशा दिखाई है।
बिजली, सड़क और बुनियादी ढांचे पर नीतीश कुमार के दावे इस यात्रा का अहम हिस्सा रहे। उन्होंने कहा कि 2018 तक हर घर बिजली पहुंचा दी गई और अब 125 यूनिट मुफ्त बिजली दी जा रही है। सोलर पैनल को बढ़ावा देने की योजना भी भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। कृषि रोडमैप, मछली, मखाना और दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार अब सिर्फ उपभोक्ता राज्य नहीं, बल्कि उत्पादन का बड़ा केंद्र बन चुका है।
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने भी मंच से नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों से वे बिहार की सेवा कर रहे हैं। सम्राट चौधरी ने रक्सौल और वाल्मीकि नगर में प्रस्तावित एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और पर्यटन विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि चंपारण आने वाले समय में बड़ा टूरिस्ट हब बनेगा।
समृद्धि यात्रा का पहला चरण 16 जनवरी से 24 जनवरी तक चलेगा, जिसमें नीतीश कुमार 9 जिलों का दौरा करेंगे। पश्चिम चंपारण के बाद वे पूर्वी चंपारण, तिरहुत और सारण प्रमंडल के जिलों में जाकर योजनाओं की जमीनी हकीकत जानेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब बिहार की राजनीति नए समीकरणों की ओर बढ़ रही है और ऐसे में नीतीश कुमार का यह दौरा सत्ता, संगठन और जनता के बीच भरोसे को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।






















