मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा (Nitish Kumar Samriddhi Yatra) का दूसरा दिन पूर्वी चंपारण के लिए खास रहा। मोतिहारी पहुंचते ही सीएम नीतीश ने साफ संकेत दिया कि यह यात्रा सिर्फ उद्घाटन और शिलान्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की नीतियों और भविष्य की दिशा को जनता के सामने रखने का माध्यम भी है। मंच से लेकर योजनाओं के स्टॉल तक, हर जगह विकास और प्रशासनिक बदलाव की झलक देखने को मिली।

मोतिहारी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, सम्राट चौधरी और मंत्री विजय कुमार चौधरी मौजूद रहे। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों और स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल का निरीक्षण किया। जीविका दीदियों द्वारा लगाए गए स्टॉल को देखकर मुख्यमंत्री विशेष रूप से प्रसन्न नजर आए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में जीविका समूहों की भूमिका आज निर्णायक बन चुकी है और महिलाओं की भागीदारी ने बिहार के सामाजिक ढांचे को नई ताकत दी है।
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अपने संबोधन में नीतीश कुमार ने शिक्षा व्यवस्था में हुए बड़े बदलावों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति कर स्कूलों को पटरी पर लाया और बाद में उन्हें सक्षमता परीक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर दिया। पांच मौके दिए गए, जिनमें से एक अवसर अब भी शेष है। उन्होंने बताया कि अब भी लगभग 73 हजार नियोजित शिक्षक बचे हैं, जिनके पास सरकारी शिक्षक बनने का अंतिम अवसर है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इन सुधारों के बाद बिहार में सरकारी शिक्षकों की संख्या बढ़कर 5 लाख 24 हजार हो चुकी है, जो शिक्षा क्षेत्र में सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जा सकती है।
नीतीश कुमार ने 24 नवंबर 2005 से पहले के बिहार की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में राज्य की पहचान डर, अव्यवस्था और बदहाल बुनियादी ढांचे से जुड़ी थी। लोग शाम के बाद घरों से निकलने से कतराते थे, सामाजिक विवाद आम बात थी और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद कमजोर थी। सड़कों की कमी और खराब हालत ने विकास को और पीछे धकेल दिया था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सत्ता में आने के बाद सरकार ने सबके हित को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू किया, जिसका नतीजा है कि आज बिहार में भयमुक्त वातावरण है और विकास की रफ्तार दिखाई देती है।
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सुरक्षा और सामाजिक समरसता के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने हर समुदाय के लिए समान रूप से काम किया है। वर्ष 2006 से कब्रिस्तानों की घेराबंदी की शुरुआत की गई, जिससे वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई। वहीं 2016 से 60 वर्ष से अधिक पुराने मंदिरों की घेराबंदी कराई गई, ताकि धार्मिक स्थलों पर चोरी जैसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि इन कदमों से न सिर्फ सुरक्षा बढ़ी है, बल्कि समाज में विश्वास का माहौल भी बना है।






















