पूर्वी चंपारण आज एक साथ आस्था, राजनीति और विकास का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी बहुचर्चित ‘समृद्धि यात्रा’ (Nitish Kumar Samriddhi Yatra) के तहत जिले के दौरे पर पहुंचेंगे, जहां धार्मिक प्रतीकों के साथ-साथ विकास योजनाओं का भी बड़ा संदेश दिया जाएगा। यह यात्रा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का संकेत भी मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री की यात्रा की शुरुआत कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया से होगी। सुबह करीब 11 बजकर 50 मिनट पर वे हेलिकॉप्टर से कैथवलिया पहुंचेंगे और वहां निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में आयोजित विशेष पूजा में भाग लेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना से जुड़े आयोजन में उनकी उपस्थिति तय है। धार्मिक आस्था से जुड़े इस कार्यक्रम को स्थानीय लोगों के साथ-साथ राज्य स्तर पर भी विशेष महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि इसे सांस्कृतिक पर्यटन और क्षेत्रीय पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।
धार्मिक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोतिहारी पहुंचेंगे, जहां वे जिले के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की घोषणा करेंगे। इन योजनाओं में बुनियादी ढांचे, सड़क, शिक्षा और स्थानीय जरूरतों से जुड़े कार्य शामिल होने की संभावना है। सरकार के स्तर पर इसे पूर्वी चंपारण को विकास की मुख्यधारा में और मजबूती से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इस दौरे से पहले बेतिया में दिए गए मुख्यमंत्री के बयान भी सियासी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। नीतीश कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि जिन योजनाओं के तहत दो लाख रुपये देने की बात की गई है, उसमें आगे और अधिक राशि भी दी जाएगी। उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का जिक्र करते हुए कहा कि पहले महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन उनकी सरकार ने इस दिशा में ठोस काम किया। अब तक हुए चार चुनावों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इसका प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि उनकी सरकार ने 2013 और 2019 में 35 प्रतिशत आरक्षण का फैसला लेकर सामाजिक संतुलन को मजबूत किया। शिक्षा और स्वास्थ्य को उन्होंने अपनी सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि पहले की सरकारों ने इन क्षेत्रों में ठोस काम नहीं किया, जबकि उनकी सरकार ने पोशाक योजना, साइकिल योजना और नियोजित शिक्षकों की बहाली जैसे कदम उठाकर शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास किया।
शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से 2 लाख 58 हजार सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति की गई। बाद में यह महसूस किया गया कि सभी नियोजित शिक्षकों को बीपीएससी की प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं है, इसलिए उनके लिए अलग से परीक्षा प्रणाली शुरू की गई। नियोजित शिक्षकों को पांच मौके दिए गए, जिनमें से चार परीक्षाएं हो चुकी हैं और अब केवल 74 हजार शिक्षक बचे हैं। एक अवसर अभी भी शेष है, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षकों को स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है।






















