बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ आज सीमावर्ती जिलों सीतामढ़ी और शिवहर तक पहुंच रही है। यह दौरा केवल शिलान्यास और उद्घाटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे राज्य सरकार के विकास मॉडल, प्रशासनिक निगरानी और जनभागीदारी के एक ठोस प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को सशक्त करने और योजनाओं के वास्तविक लाभ को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिहाज से यह यात्रा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से अहम मानी जा रही है।
सीतामढ़ी जिले के लिए मुख्यमंत्री की यह यात्रा बड़े आर्थिक पैकेज के साथ आ रही है। जिले को 554 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं की सौगात दी जाएगी, जिससे सड़क, भवन, आधारभूत संरचना और जनसुविधाओं को नई गति मिलेगी। 346 करोड़ रुपये की लागत से 41 नई विकास योजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, जबकि 208.12 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हो चुकी 26 योजनाओं का लोकार्पण कर उन्हें जनता को समर्पित किया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इन परियोजनाओं से न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
पटना में ‘जन-सुनवाई’ का नया मॉडल: हर सोमवार-शुक्रवार अफसरों से सीधी मुलाकात.. आज से शुरू
क्षेत्रफल और संसाधनों के लिहाज से छोटे शिवहर जिले के लिए भी मुख्यमंत्री का फोकस उतना ही स्पष्ट है। यहां 42 करोड़ रुपये की लागत वाली 75 योजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा, वहीं 17 करोड़ रुपये के बजट से 28 नई परियोजनाओं का शिलान्यास होगा। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बुनियादी सुविधाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी, जिससे पलायन जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।
समृद्धि यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘जनसंवाद’ कार्यक्रम है, जिसे मुख्यमंत्री की प्रशासनिक शैली की पहचान माना जाता है। इस मंच के जरिए नीतीश कुमार सीधे ग्रामीणों, लाभार्थियों और स्थानीय नागरिकों से संवाद करेंगे। योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं, इसकी जमीनी हकीकत मुख्यमंत्री खुद जानेंगे। शिकायतों और सुझावों के आधार पर अधिकारियों को मौके पर ही दिशा-निर्देश दिए जाएंगे, जिससे शासन और जनता के बीच की दूरी कम हो सके।
बंगाल की सियासत में बिहार का ‘ऑर्गनाइजेशन फॉर्मूला’.. राज्य के 7 नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी
यह यात्रा केवल घोषणाओं का मंच नहीं है, बल्कि इसमें जवाबदेही भी तय की जाएगी। मुख्यमंत्री विकासात्मक और कल्याणकारी योजनाओं का स्थल निरीक्षण करेंगे और जिला प्रशासन के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर लंबित कार्यों की प्रगति का आकलन करेंगे। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और आधारभूत सेवाओं जैसे प्रमुख विभागों के प्रदर्शन की समीक्षा कर समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने का स्पष्ट संदेश दिया जाएगा।
सीमावर्ती सीतामढ़ी जैसे जिले में सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और आर्थिक सशक्तिकरण भी इस यात्रा के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। सरकार का जोर इस बात पर है कि विकास का लाभ केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। समृद्धि यात्रा के जरिए यह संदेश देने की कोशिश है कि प्रशासनिक मशीनरी जमीनी जरूरतों के प्रति संवेदनशील रहे और विकास निरंतर, समावेशी तथा परिणामोन्मुख हो।






















