पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी (Pappu Yadav Arrest) ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर पुराने विवादों और राजनीतिक समीकरणों को सामने ला दिया है। इस गिरफ्तारी को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है, जहां विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बता रहा है, वहीं सत्ताधारी पक्ष कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराने में जुटा है। पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को गर्म कर दिया है और नेताओं के अलग-अलग बयान इस मुद्दे को और संवेदनशील बना रहे हैं।
इस मामले में पूर्व सांसद आनंद मोहन की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा है कि अगर 31 साल पहले का मामला था तो पहले ही उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए थी। आनंद मोहन ने साफ कहा कि मेरा मानना है कि दुर्भावना से कोई बात नहीं होनी चाहिए। आनंद मोहन के इस बयान पर भी सियासी गरगर्मी बढ़ सकती है।
वहीँ भाजपा सांसद संजय जयसवाल ने पप्पू यादव के पुराने राजनीतिक और आपराधिक इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में भी वे कैदी वार्ड से सक्रिय रहे और बिहार में अपराध सिंडिकेट से जुड़े रहे। जयसवाल का बयान राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने इस मामले को केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक विमर्श का मुद्दा बना दिया है।






















