Pappu Yadav Speech: संसद के अंदर उस समय माहौल गरमा गया जब पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने बुलडोजर कार्रवाई और राष्ट्रवाद पर केंद्रित एक लंबा, तीखा और भावनात्मक भाषण देने की कोशिश की। स्पीकर लगातार उन्हें रोकते रहे, माइक बंद करने की चेतावनी भी दी गई, लेकिन पप्पू यादव अपने तेवर में डटे रहे। उन्होंने सरकार पर गरीबों के खिलाफ बुलडोजर चलाने, राष्ट्रवाद को संकीर्ण रूप में पेश करने और मानवता की अनदेखी का आरोप लगाया। साथ ही वंदे मातरम, देशभक्ति और इतिहास की व्याख्या को लेकर भी सरकार की सोच पर कई सवाल दाग दिए।
पप्पू यादव ने शुरुआत से ही सरकार पर सीधा हमला बोला। उनका आरोप था कि बिहार में बुलडोजर का इस्तेमाल गरीबों और कमजोर वर्गों को डराने के लिए किया जा रहा है और इसे राष्ट्रवाद का नाम दिया जा रहा है, जबकि असली राष्ट्रवाद मानवता और संवेदना से आता है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष सिर्फ प्रतीकों की बात करता है, जबकि असल मुद्दों रोजगार, शिक्षा, पानी, प्रदूषण, किसानों की आत्महत्या, रुपये की स्थिति से ध्यान भटकाया जा रहा है।
सांसद ने अपने भाषण में रवींद्रनाथ टैगोर को कई बार उद्धृत किया और कहा कि टैगोर संकीर्ण राष्ट्रवाद के खिलाफ थे, उनका राष्ट्रीयता का विचार मानवता पर आधारित था। पप्पू यादव ने वंदे मातरम की व्याख्या करते हुए दावा किया कि यह गीत सिर्फ सम्मान का विषय नहीं बल्कि जिम्मेदारी, मूल्य और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 150 साल बाद भी कुछ लोग ‘संस्कार’ की बात कर रहे हैं, जबकि दुनिया आर्थिक स्वतंत्रता, ग्लोबल वॉर्मिंग, पर्यावरण और मानव अधिकारों पर विमर्श कर रही है।
उनकी आलोचना सिर्फ विचारधारा तक सीमित नहीं रही। उन्होंने आजादी के इतिहास का भी जिक्र करते हुए केंद्र सरकार और खासकर दक्षिणपंथी राजनीति पर कठोर सवाल उठाए। उनका कहना था कि आजादी के दौरान नेहरू और अन्य नेता जेल में थे, मिट्टी पर थे, संघर्ष में थे, जबकि आज राष्ट्रवाद का दावा करने वाले तब कहीं नहीं दिखे। उन्होंने अंग्रेजों से सहयोग के आरोप दोहराए और पूछा कि आखिर तिरंगे और राष्ट्रीय गान से बड़ा कौन-सा विचार इन संगठनों के लिए रहा है।
स्पीकर ने बार-बार उन्हें समय सीमा की याद दिलाई, माइक बंद होने की चेतावनी दी, लेकिन पप्पू यादव लगातार बोलते रहे। उन्होंने मोदी सरकार पर सीधे प्रहार करते हुए कहा कि आज भारत आर्थिक और सामाजिक रूप से कई संकटों से जूझ रहा है, लेकिन सरकार नफरत और विभाजन की राजनीति में व्यस्त है। उनका कहना था कि देश के मुद्दे रोजगार, रुपये की स्थिति, किसानों की परेशानियां, शिक्षा और स्किल विकास हैं, लेकिन चर्चा होती है कब्रिस्तान और ध्रुवीकरण पर।






















